रामलीला मंच से कलम एवं कर्मवीरों को मिला सम्मान
राकेश शर्मा
खेतासराय, जौनपुर। जिस मंच से मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के त्याग, समर्पण और लोककल्याण का संदेश गूंजता है, उसी मंच से समाज के उन कर्मवीरों को सम्मान मिला जो अपनी कलम और सेवा के जरिए दूसरों के जीवन में उम्मीद की रोशनी जगाते हैं। नगर के बभनौटी वार्ड में आयोजित श्री हनुमान मंदिर रामलीला समिति का मंच उस समय भावनात्मक क्षणों का साक्षी बना जब समाज की पीड़ा को शब्द देने वाले पत्रकारों और जरूरतमंदों के दुख-दर्द में सहभागी बनने वाले समाजसेवियों को सम्मानित किया गया।
तालियों की गड़गड़ाहट के बीच हुए इस सम्मान समारोह ने यह संदेश दिया कि समाज की असली पहचान केवल बड़े पदों और प्रतिष्ठा से नहीं, बल्कि निस्वार्थ सेवा, संवेदनशीलता और सामाजिक जिम्मेदारियों के निर्वहन से होती है। कार्यक्रम में बतौर अतिथि डॉ. अवनीश सिंह बघेल एवं समाजसेवी सतीश यादव उपस्थित रहे। समिति की ओर से दर्जनों पत्रकारों एवं समाजसेवियों को स्मृति चिह्न और अंगवस्त्र भेंटकर सम्मानित किया गया। आस्था और संस्कृति के इस मंच पर कलम और सेवा के प्रति दिखाए गए सम्मान ने समारोह को विशेष गरिमा प्रदान किया।
इस अवसर पर मार्कंडेय पाण्डेय, मंदीप पाण्डेय, अखिलेश पाण्डेय, रामदवर प्रजापति, वरिष्ठ भाजपा नेता शांतिभूषण मिश्रा, मनीष गुप्ता, अशोक यादव, विशाल मोदनवाल, ऋषभ यादव, राजकेसर सहित तमाम लोग उपस्थित रहे। अंत में समिति के अध्यक्ष जगदंबा प्रसाद पाण्डेय और प्रबंधक डॉ. अशोक पाण्डेय ने अतिथियों, पत्रकारों, समाजसेवियों एवं उपस्थित लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया।
समाज की पीड़ा को शब्द देना भी सबसे बड़ी सेवा: सतीश यादव
समाजसेवी सतीश यादव ने कहा कि भगवान श्रीराम का संपूर्ण जीवन त्याग, मर्यादा, करुणा और लोक कल्याण की प्रेरणा देता है। रामलीला केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि समाज को सही दिशा दिखाने वाली एक जीवंत पाठशाला है। इसकी वास्तविक सार्थकता तभी है जब भगवान श्रीराम के आदर्श हमारे व्यवहार और आचरण में दिखाई दें। समाज की असली ताकत वे लोग हैं, जो दूसरों की तकलीफ को अपनी तकलीफ समझते हैं। पत्रकार अपनी कलम से उन लोगों की आवाज बनते हैं, जिनकी पीड़ा अक्सर जिम्मेदारों तक नहीं पहुंच पाती। वहीं समाजसेवी बिना किसी स्वार्थ के जरूरतमंदों के आंसू पोंछने और उनके जीवन में उम्मीद जगाने का काम करते हैं। जब किसी गरीब की आवाज दबने लगती है तब पत्रकार की कलम उसका सहारा बनती है और जब कोई जरूरतमंद मुश्किलों में घिर जाता है तब समाजसेवी का बढ़ा हुआ हाथ उसके लिए उम्मीद बनता है। यही पत्रकारिता और समाजसेवा की वास्तविक शक्ति है। ऐसे लोगों का सम्मान केवल व्यक्तियों का सम्मान नहीं, बल्कि उनके संघर्ष, समर्पण और समाज के प्रति निभाई जा रही जिम्मेदारियों का सम्मान है। सम्मान मिलने से जहां व्यक्ति का मनोबल बढ़ता है, वहीं समाज के प्रति उसका दायित्व भी कई गुना बढ़ जाता है। रामलीला समिति ने पत्रकारों और समाजसेवियों को सम्मानित कर एक सराहनीय परंपरा को आगे बढ़ाया है।
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