Jaunpur News: राम कथा सुनना सौभाग्य की बात: शांतनु जी महाराज

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Jaunpur News: राम कथा सुनना सौभाग्य की बात: शांतनु जी महाराज




कहा— भगवान श्रीराम के आदर्शों पर चलने की जरूरत

रामकथा के दौरान श्रद्धालुओं को मिला भक्ति, संस्कार और मर्यादा का संदेश

शुभांशू जायसवाल

जौनपुर। धर्म और आस्था की पावन धरती जौनपुर में आयोजित श्रीराम कथा के दौरान पूज्य शांतनु जी महाराज ने श्रद्धालुओं को भगवान श्रीराम के आदर्शों को अपने जीवन में आत्मसात करने का संदेश दिया। साथ ही कहा कि श्रीराम कथा का श्रवण करना अपने आप में परम सौभाग्य की बात है लेकिन कथा की वास्तविक सार्थकता तभी है, जब मनुष्य इसके संदेशों को अपने जीवन में उतारे और प्रभु श्रीराम के बताए मार्ग पर चलने का संकल्प ले।

महाराज जी ने कहा कि भगवान श्रीराम का संपूर्ण जीवन त्याग, तपस्या, सत्य, मर्यादा, करुणा और कर्तव्यनिष्ठा की अनुपम मिसाल है। उनके आदर्श आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं, जितने त्रेतायुग में थे। वर्तमान में समाज को भगवान श्रीराम के चरित्र से प्रेरणा लेकर अपने जीवन में नैतिक मूल्यों, पारिवारिक संस्कारों और सामाजिक सद्भाव को मजबूत करने की आवश्यकता है। कथा श्रवण की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि रामकथा के लिए श्रद्धालुओं का एकत्रित होना अच्छी बात है लेकिन कथा का श्रवण पूर्ण एकाग्रता, श्रद्धा और भाव के साथ करना चाहिए। जब कथा चल रही हो, तब मन को इधर-उधर की बातों में लगाने के बजाय भगवान की लीलाओं, उनके उपदेशों और उनके आदर्शों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। कथा केवल कानों से सुनने का विषय नहीं, बल्कि हृदय में उतारने और आचरण में अपनाने का माध्यम है।

रामकथा सुनने का अवसर मिलना भी प्रभु की कृपा है

शांतनु जी महाराज ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को रामकथा श्रवण का अवसर प्राप्त नहीं होता। जो श्रद्धालु अपना समय निकालकर भगवान श्रीराम की कथा सुनने आते हैं, वे निश्चित रूप से सौभाग्यशाली हैं। इस अवसर का लाभ उठाते हुए प्रत्येक व्यक्ति को अपने भीतर सकारात्मक विचारों, अच्छे संस्कारों और धर्म के प्रति आस्था को विकसित करना चाहिए। प्रभु श्रीराम का स्मरण मन को शांति प्रदान करता है और उनके आदर्श जीवन को सही दिशा देने की प्रेरणा देते हैं। महाराज जी ने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि वे रामकथा को केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित न रखें, बल्कि इसके संदेशों को अपने परिवार, समाज और दैनिक जीवन का हिस्सा बनाएं। यदि प्रत्येक व्यक्ति सत्य का साथ देने, माता-पिता का सम्मान करने, अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने और दूसरों के प्रति प्रेम एवं सद्भाव रखने का संकल्प ले तो समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाया जा सकता है।


आयोजक ज्ञान प्रकाश सिंह के प्रयासों को सराहा

श्रीराम कथा के आयोजन को लेकर शांतनु जी महाराज ने आयोजक ज्ञान प्रकाश सिंह के प्रति आभार व्यक्त करते हुए उनके प्रयासों की सराहना किया। साथ ही कहा कि धार्मिक आयोजनों के माध्यम से समाज को अपनी संस्कृति, परंपराओं और आध्यात्मिक मूल्यों से जोड़ना सराहनीय कार्य है। ऐसे आयोजन लोगों के मन में भक्ति की भावना जागृत करने के साथ नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति और भगवान श्रीराम के आदर्शों से परिचित कराने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। बी.आर.पी. कॉलेज परिसर में आयोजित श्रीराम कथा श्रद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक आनंद और आत्मचिंतन का अवसर बन रही है। कथा के माध्यम से लोगों को यह संदेश मिल रहा है कि भगवान श्रीराम का नाम लेने के साथ-साथ उनके आदर्शों को अपनाना भी आवश्यक है।


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