जौनपुर। राजकीय होम्योपैथिक चिकित्सालय आरा में योग प्रशिक्षक के पद पर कार्यरत राज यादव ने कहा कि हिंदी दिवस हर साल 14 सितंबर को मनाया जाता है। इसी दिन 1949 में संविधान सभा ने हिंदी को भारत की राजभाषा के रूप में स्वीकार किया था। इसीलिए इस दिन को हिंदी के सम्मान और प्रचार-प्रसार के लिए समर्पित किया गया है। हिंदी केवल एक भाषा नहीं, बल्कि भारत की संस्कृति, सभ्यता और एकता की पहचान है। यह देश की सबसे ज्यादा बोली और समझी जाने वाली भाषा है। उत्तर भारत से लेकर दक्षिण भारत तक, लोग हिंदी के माध्यम से आसानी से जुड़ जाते हैं। हिंदी ने स्वतंत्रता संग्राम के दौरान भी देश को एक सूत्र में पिरोने का काम किया था।
उन्होंने कहा कि आज हिंदी विश्व में तीसरी सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषा है। यह सिर्फ भारत में ही नहीं, बल्कि मॉरीशस, फिजी, सूरीनाम, नेपाल और अमेरिका जैसे कई देशों में भी बोली और पढ़ाई जाती है। बॉलीवुड, साहित्य और सोशल मीडिया ने हिंदी को वैश्विक पहचान दिलाई है लेकिन आज के दौर में अंग्रेजी के बढ़ते प्रभाव के कारण हिंदी के प्रति लोगों में उदासीनता देखने को मिलती है। कई लोग हिंदी बोलने में शर्म महसूस करते हैं। यह सोच गलत है। अपनी मातृभाषा पर गर्व करना चाहिए। सरकार द्वारा हिंदी पखवाड़ा, निबंध प्रतियोगिता, कवि सम्मेलन जैसे कार्यक्रम आयोजित कर हिंदी को बढ़ावा दिया जाता है।
हिंदी दिवस हमें यह याद दिलाता है कि हम अपनी भाषा का सम्मान करें और अपने रोजमर्रा के जीवन में, कार्यालयों में और शिक्षा में हिंदी का अधिक से अधिक प्रयोग करें। हिंदी सरल, वैज्ञानिक और भावनाओं को व्यक्त करने में सक्षम भाषा है।
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