Jaunpur News: चालान पर सख्ती, मगर सड़क एवं अपराध पर कब होगी कार्यवाही?

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जौनपुर में एक दिन में 1022 वाहनों का हुआ चालान

गड्ढों से जूझ रहा शहर, वसूली ने भी खड़े किये गम्भीर सवाल

सुशील स्वामी

जौनपुर। यातायात नियमों के पालन को लेकर जौनपुर पुलिस लगातार अभियान चला रही है। बीते 23 सितंबर को यातायात पुलिस और विभिन्न थानों की टीमों ने संयुक्त अभियान चलाकर 1,022 वाहनों का चालान किया। पुलिस के अनुसार बिना हेलमेट, बिना सीट बेल्ट, तीन सवारी और वैध प्रपत्रों के अभाव में वाहन चलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की गई।

यातायात नियमों का पालन कराना पुलिस की जिम्मेदारी है और नियम तोड़ने वालों के खिलाफ कार्रवाई भी जरूरी है लेकिन सवाल यह है कि क्या पुलिस की सक्रियता केवल चालान काटने तक सीमित दिखाई दे रही है? शहर की बदहाल सड़कों, जगह-जगह बने गड्ढों और यातायात व्यवस्था से जुड़ी दूसरी समस्याओं पर भी उतनी ही गंभीरता दिखाई दे रही है या नहीं?


छोटी गाड़ियों पर कार्यवाही, बड़ी गाड़ियों पर सवाल

शहर में अक्सर दो पहिया और छोटे वाहनों की चेकिंग और चालान की कार्रवाई दिखाई देती है। ऐसे में आम लोगों के बीच यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या भारी वाहनों, नियमों का उल्लंघन करने वाले बड़े वाहनों सहित अन्य प्रभावशाली वाहन चालकों के खिलाफ भी उसी स्तर पर कार्यवाही होती है? पुलिस को यातायात नियमों का पालन कराने के साथ यह भी सुनिश्चित करना होगा कि कार्रवाई समान रूप से और बिना भेदभाव के हो। केवल चालान की संख्या बढ़ना यातायात व्यवस्था सुधारने का अकेला पैमाना नहीं हो सकता।


सड़कों के गड्ढे भी तो यातायात के लिये हैं खतरा

जौनपुर शहर की कई प्रमुख सड़कों पर गड्ढे और क्षतिग्रस्त सड़कें वाहन चालकों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई हैं। बारिश के बाद कई स्थानों पर स्थिति और खराब हुई है। गड्ढों के कारण दो पहिया वाहन चालकों के साथ ऑटो सहित अन्य वाहनों के दुर्घटनाग्रस्त होने का खतरा बना रहता है। गौर करने वाली बात यह है कि 14 सितंबर की देर रात जिलाधिकारी सैमुअल पाल एन. स्वयं शहर की सड़कों का निरीक्षण करने निकले थे। उन्होंने प्रमुख मार्गों पर सड़कों की स्थिति, गड्ढों, प्रकाश और जल निकासी व्यवस्था का जायजा लिया तथा संबंधित अधिकारियों को सुधार के निर्देश दिए थे। जब जिलाधिकारी को रात में सड़क की हकीकत देखने के लिए स्वयं सड़क पर उतरना पड़ रहा है तो यातायात पुलिस की ओर से भी ऐसे स्थानों को चिन्हित कर संबंधित विभागों को सूचना देने और दुर्घटना संभावित स्थानों पर तत्काल यातायात प्रबंधन की जरूरत महसूस होती है।

चालान बढ़े मगर अपराध पर भी उतनी ही निगरानी जरूरी

इधर जिले में पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर भी हाल के मामलों ने गंभीर सवाल खड़े किए हैं। जलालपुर और सुरेरी थानों से जुड़े कथित लूट और जबरन वसूली के मामलों की जांच के लिए एसआईटी गठित हुई और दो निलंबित आरक्षियों समेत 3 आरोपितों की गिरफ्तारी की गई है। दो अन्य आरोपितों ने न्यायालय में आत्मसमर्पण किया। इसी बीच शराब के नशे में सड़क पर मिले एक आरक्षी को भी निलंबित किए जाने की रिपोर्ट सामने आई है और एक आरक्षी जिला चिकित्सालय में भी शराब पीकर के उपद्रव कर रहा। इन घटनाओं के बाद स्वाभाविक सवाल यह है कि यातायात नियम तोड़ने वाले आम नागरिकों पर कार्रवाई के साथ पुलिस विभाग के भीतर अनुशासन और जवाबदेही को लेकर भी क्या उसी तरह की सख्ती दिखाई जा रही है?


——इनसेट——

पुलिस के सामने दोहरी चुनौती

जौनपुर पुलिस के सामने चुनौती केवल यातायात नियमों का पालन कराने की नहीं है। अपराध नियंत्रण, संदिग्ध गतिविधियों पर निगरानी, पुलिसकर्मियों के आचरण पर नियंत्रण और आम नागरिकों में सुरक्षा का भरोसा कायम रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। चालान की संख्या निश्चित रूप से पुलिस की कार्रवाई का एक आंकड़ा है लेकिन आम जनता के लिए असली सवाल यह है कि सड़क सुरक्षित हुई या नहीं, अपराध पर अंकुश लगा या नहीं और पुलिस के प्रति भरोसा मजबूत हुआ या नहीं। यातायात नियमों का पालन कराने की कार्रवाई जारी रहनी चाहिए लेकिन उसके साथ शहर की जर्जर सड़कों, दुर्घटना संभावित स्थानों और अपराध नियंत्रण पर भी समान गंभीरता से ध्यान देने की जरूरत है। आखिर चालान से सड़क के गड्ढे नहीं भरेंगे और केवल यातायात कार्रवाई से अपराध नियंत्रण का लक्ष्य पूरा नहीं होगा।

अब सवाल यह है कि 1,022 चालानों के बाद पुलिस और संबंधित विभाग अगली कार्रवाई किस दिशा में करते हैं— सड़क की सुरक्षा, अपराध नियंत्रण और विभागीय जवाबदेही की ओर या फिर अगले दिन फिर चालान के आंकड़े तक?


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