जनसंचार के विस्तार ने हिन्दी पत्रकारिता के लिये नये अवसर पैदा किये: प्रो. मनोज
डिजिटल युग में हिन्दी की पहुंच वैश्विक स्तर पर बढ़ी: डॉ. सुनील कुमार
शुभांशू जायसवाल
जौनपुर। हिंदी दिवस पर सोमवार को पूर्वांचल विश्वविद्यालय के जनसंचार एवं पत्रकारिता विभाग में हिंदी भाषा की वर्तमान प्रासंगिकता तथा डिजिटल युग में हिंदी के बढ़ते प्रभाव को लेकर गोष्ठी हुई।
गोष्ठी में प्रबंध अध्ययन संकाय के अध्यक्ष प्रो. अविनाश पाथर्डीकर ने कहा कि आज कृत्रिम बुद्धिमत्ता भी हिंदी भाषा को समझ रहा है और हिंदी में संवाद, अनुवाद, लेखन, आवाज़ की पहचान और जवाब देने में भी सक्षम है। हिंदी केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक चेतना, संवेदना और सामाजिक विविधता को जोड़ने वाली भाषा है।
जनसंचार एवं पत्रकारिता विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. मनोज मिश्रा ने कहा कि जनसंचार के विस्तार ने हिंदी पत्रकारिता के लिए नए अवसर पैदा किए हैं। आज हिंदी का पाठक वर्ग केवल अखबार तक सीमित नहीं है, बल्कि मोबाइल और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी सक्रिय है। विज्ञान संकाय के अध्यक्ष प्रो. प्रदीप कुमार ने कहा कि विज्ञान और तकनीकी को आम आदमी से जोड़ने में हिंदी बड़ी भूमिका निभा रही है। आज राष्ट्रीय शिक्षा निति के अंतर्गत विज्ञान कि बहुत सारी सामग्री हिंदी में तैयार हुई है।
जनसंचार विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. सुनील कुमार ने कहा कि डिजिटल क्रांति ने हिंदी को अभूतपूर्व विस्तार दिया है। सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म ने हिंदी को वैश्विक मंच तक पहुंचाने का काम किया है लेकिन भाषा का विस्तार तभी सार्थक है जब उसके साथ पत्रकारिता की विश्वसनीयता, तथ्य-जांच और सामाजिक जिम्मेदारी भी मजबूत हो। पत्रकारिता के विद्यार्थियों को हिंदी की समृद्ध शब्द-संपदा के साथ नई मीडिया तकनीकों में भी दक्ष होना होगा। गोष्ठी का संचालन जनसंचार विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. दिग्विजय सिंह राठौर ने किया। इस अवसर पर विभिन्न विभागों के शिक्षकगण, शोधार्थी एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।
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