Jaunpur News: सामूहिक इस्तीफा देने पहुंचे एनएचएम संविदाकर्मी तो सीएमओ कार्यालय में मचा हड़कम्प

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जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक में 3 कर्मियों को पुलिस से कोतवाली भेजे जाने से नाराज थे कर्मचारी

सीएमओ ने समझा-बुझाकर वापस काम पर भेजा

अजय पाण्डेय

जौनपुर। जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक में तीन ब्लॉक लेखा प्रबंधकों को पुलिस के माध्यम से कोतवाली भेजे जाने के विरोध में मंगलवार को बड़ी संख्या में एनएचएम संविदाकर्मी सामूहिक इस्तीफा देने मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय पहुंच गए। एक साथ बड़ी संख्या में कर्मचारियों के इस्तीफा देने पहुंचने से सीएमओ कार्यालय में हड़कंप की स्थिति पैदा हो गई। कर्मचारियों ने अपनी नाराजगी जताते हुए कहा कि 28 सितंबर की घटना से वे मानसिक और सामाजिक रूप से आहत हैं और ऐसी परिस्थितियों में काम करना उनके लिए मुश्किल हो गया है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने कर्मचारियों से बातचीत की और उन्हें समझा-बुझाकर शांत कराया। काफी देर तक चली बातचीत के बाद कर्मचारियों को तत्काल इस्तीफा देने के बजाय काम पर लौटने के लिए राजी किया गया। इसके बाद कर्मचारी वापस अपने कार्य पर लौट गये। दरअसल 28 सितंबर को कलेक्ट्रेट सभागार में जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक हुई थी। बैठक में जननी सुरक्षा योजना (जेएसवाई) के लाभार्थियों के भुगतान की समीक्षा की जा रही थी। इसी दौरान खुटहन के ब्लॉक लेखा प्रबंधक अजय द्विवेदी, मुंगराबादशाहपुर के ब्लॉक लेखा प्रबंधक मुकेश मौर्य और महराजगंज के ब्लॉक लेखा प्रबंधक विनोद कुमार के क्षेत्रों में जेएसवाई भुगतान की स्थिति को लेकर चर्चा हुई।

संविदाकर्मियों की ओर से सीएमओ को दिए गए पत्र में कहा गया है कि 28 सितंबर को पोर्टल पर खुटहन और मुंगराबादशाहपुर में 80-80 प्रतिशत तथा महराजगंज में 81 प्रतिशत भुगतान प्रदर्शित हो रहा था। कर्मचारियों का दावा है कि इसी दिन राज्य स्तर पर जेएसवाई भुगतान 78 प्रतिशत था और जौनपुर की स्थिति 14वें पायदान पर थी। उनका यह भी कहना है कि 20 सितंबर से 28 सितंबर तक एसएनए पोर्टल के काम नहीं करने के कारण भुगतान संबंधी प्रक्रिया प्रभावित हुई थी।

संविदाकर्मियों ने आरोप लगाया है कि भुगतान की समीक्षा के दौरान जिला कार्यक्रम प्रबंधक एनएचएम और जिला मातृत्व स्वास्थ्य समन्वयक की ओर से संबंधित ब्लॉकों की स्थिति जिलाधिकारी के समक्ष बताई गई। कर्मचारियों का आरोप है कि इसके बाद जिलाधिकारी ने बैठक के दौरान सदर कोतवाली के प्रभारी को बुलाया और पुलिस वाहन से तीनों ब्लॉक लेखा प्रबंधकों को कोतवाली भेज दिया गया। इसी घटना को लेकर एनएचएम संविदाकर्मियों में नाराजगी बढ़ गई। कर्मचारियों ने इसे अपने साथ मानसिक और सामाजिक प्रताड़ना बताते हुए सामूहिक रूप से पद से त्यागपत्र देने का निर्णय लिया था।

मंगलवार को कर्मचारी अपने सामूहिक इस्तीफे का पत्र लेकर सीएमओ कार्यालय पहुंचे तो अचानक कार्यालय परिसर में अफरा-तफरी जैसी स्थिति बन गई। कर्मचारियों की संख्या बढ़ने पर अधिकारियों ने उनसे बातचीत शुरू की। कर्मचारियों ने अपनी बात रखते हुए 28 सितंबर की घटना पर नाराजगी जताई और कहा कि यदि कार्यस्थल पर इस तरह की कार्रवाई का भय बना रहा तो उनके लिए काम करना कठिन होगा।

सीएमओ ने कर्मचारियों की बात सुनी और मौके की गंभीरता को देखते हुए उन्हें समझाया-बुझाया। उन्होंने कर्मचारियों से तत्काल कोई कठोर कदम नहीं उठाने और अपने कार्य पर लौटने का आग्रह किया। बातचीत के बाद कर्मचारी वापस काम पर लौट गए। हालांकि कर्मचारियों की नाराजगी पूरी तरह समाप्त हुई या नहीं, इसे लेकर स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है।

एनएचएम के तहत बड़ी संख्या में संविदाकर्मी स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े विभिन्न कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे में यदि सभी कर्मचारी एक साथ इस्तीफा दे देते तो स्वास्थ्य विभाग के कई कार्यक्रमों और योजनाओं के संचालन पर असर पड़ने की आशंका थी। यही वजह रही कि सीएमओ कार्यालय में कर्मचारियों के पहुंचने के बाद अधिकारियों ने तत्काल बातचीत के जरिए मामला शांत कराने का प्रयास किया।

फिलहाल कर्मचारियों के काम पर लौटने से तत्काल संकट टल गया है लेकिन 28 सितंबर की घटना को लेकर कर्मचारियों में बनी नाराजगी और उनके आरोपों पर प्रशासनिक स्तर से क्या कार्रवाई होती है, इस पर सभी की नजर बनी हुई है।


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