हिमांशु श्रीवास्तव एडवोकेट
जौनपुर। सड़क पर थोड़ी सी लापरवाही किस तरह किसी परिवार की पूरी जिंदगी बदल देती है, इसका दर्दनाक उदाहरण सामने आया है। अलग-अलग सड़क दुर्घटनाओं में एक प्रधानाध्यापक और एक आरक्षी की जान चली गई जबकि एक आभूषण व्यवसायी को अपना दाहिना पैर गंवाना पड़ा। तीनों मामलों में दुर्घटना करने वाले वाहन चालकों की लापरवाही साबित होने पर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल के पीठासीन अधिकारी मनोज अग्रवाल ने मृतकों के स्वजनों और घायल को ब्याज सहित कुल 2.49 करोड़ रुपये क्षतिपूर्ति देने का आदेश संबंधित बीमा कंपनियों को दिया है। न्यायालय ने क्षतिपूर्ति की धनराशि दो माह के भीतर अदा करने का निर्देश दिया है।
एक हादसे ने परिवार से छीना प्रधानाध्यापक
29 फरवरी 2024 को खुटहन थाना क्षेत्र के डिहिया गांव निवासी 58 वर्षीय प्रधानाध्यापक फूलचंद प्रजापति बाइक से जा रहे थे। इसी दौरान दूसरी बाइक के चालक ने उनकी बाइक में टक्कर मार दी। दुर्घटना में उनकी मृत्यु हो गई। परिवार की ओर से चालक, वाहन मालिक और बीमा कंपनी के विरुद्ध क्षतिपूर्ति याचिका दाखिल की गई। न्यायालय ने साक्ष्यों के आधार पर विपक्षी बाइक चालक की लापरवाही सिद्ध पाते हुए आईसीआईसीआई लोम्बार्ड जनरल इंश्योरेंस कंपनी को एक करोड़ रुपये ब्याज सहित क्षतिपूर्ति अदा करने का आदेश दिया।
ड्यूटी से जाते समय आरक्षी की दर्दनाक हुई मौत
दूसरे मामले में 31 दिसंबर 2022 को सरायख्वाजा थाने में तैनात आरक्षी संतोष तिवारी बाइक से आजमगढ़ जा रहे थे। रास्ते में बोलेरो की टक्कर से हुए हादसे में उनकी मृत्यु हो गई। आरक्षी की मौत से परिवार को गहरा आघात पहुंचा। मामले में बोलेरो चालक, मालिक और बीमा कंपनी के विरुद्ध क्षतिपूर्ति याचिका दाखिल की गई। न्यायालय ने चालक की लापरवाही सिद्ध होने पर चोलामंडलम जनरल इंश्योरेंस कंपनी को 72 लाख रुपये ब्याज सहित क्षतिपूर्ति देने का आदेश दिया।
ट्रक की टक्कर ने आभूषण व्यवसायी का जीवन बदल दिया
तीसरे मामले में 22 जनवरी 2021 को कोतवाली क्षेत्र के ताड़तला निवासी आभूषण व्यवसायी दिनेश सेठ बाइक से जा रहे थे। सेंट पैट्रिक स्कूल के पास ट्रक की टक्कर से वह गंभीर रूप से घायल हो गए। दुर्घटना इतनी गंभीर थी कि उन्हें अपना दाहिना पैर गंवाना पड़ा। इस स्थायी शारीरिक क्षति ने उनके सामान्य जीवन और व्यवसाय को भी प्रभावित किया।
मामले में ट्रक चालक, मालिक और बीमा कंपनी के विरुद्ध क्षतिपूर्ति याचिका दाखिल की गई। साक्ष्यों के आधार पर ट्रक चालक की लापरवाही सिद्ध होने पर न्यायालय ने द न्यू इंडिया इंश्योरेंस कंपनी को 77 लाख रुपये ब्याज सहित क्षतिपूर्ति अदा करने का आदेश दिया।
तीन मामलों में 2.49 करोड़ की क्षतिपूर्ति
तीनों मामलों में याचीगण की ओर से अधिवक्ता हिमांशु श्रीवास्तव ने गवाहों को परीक्षित कराया और न्यायालय के समक्ष प्रभावी बहस की। न्यायालय ने दुर्घटनाओं में संबंधित वाहन चालकों की लापरवाही सिद्ध पाए जाने पर बीमा कंपनियों को क्षतिपूर्ति देने का आदेश दिया।
हादसे सिर्फ आंकड़े नहीं, उजड़ते परिवारों की कहानी हैं। इन मामलों में न्यायालय का आदेश न केवल पीड़ित परिवारों और घायल को आर्थिक राहत देता है, बल्कि सड़क पर सतर्कता और जिम्मेदारी से वाहन चलाने की जरूरत का गंभीर संदेश भी देता है। एक चालक की लापरवाही किसी परिवार से कमाने वाला सदस्य छीन सकती है और किसी व्यक्ति को जीवनभर के लिए शारीरिक अक्षमता के साथ जीने को मजबूर कर सकती है। सड़क सुरक्षा के नियमों का पालन और जिम्मेदारी से वाहन चलाना ही ऐसे हादसों को रोकने का सबसे प्रभावी माध्यम है।
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