Jaunpur News: न्याय की बड़ी जीत: ट्रिब्यूनल का ऐतिहासिक फैसला

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सड़क दुर्घटना पीड़ितों को 92 लाख क्षतिपूर्ति का आदेश

गृहिणी को 'राष्ट्र निर्माता' मानते हुये 30,000 मासिक आय तय

सुप्रीम कोर्ट के नजीर बने फैसले का हुआ अनुपालन

हिमांशु श्रीवास्तव

जौनपुर। सड़क हादसों में अपनी शारीरिक क्षमता और आजीविका गंवाने वाले पीड़ितों के पक्ष में मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (ट्रिब्यूनल) के जज मनोज अग्रवाल ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अदालत ने दो अलग-अलग सड़क दुर्घटना मामलों में बीमा कंपनी और उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम (UPSRTC) की लापरवाही पर कड़ा रुख अपनाते हुए पीड़ितों को कुल 92 लाख रुपये क्षतिपूर्ति (मुआवजा) दो महीने के भीतर अदा करने का आदेश दिया है। यह फैसला न केवल पीड़ितों के पुनर्वास के लिए एक बड़ा सहारा है, बल्कि सड़क पर बरती जाने वाली लापरवाही पर एक कड़ा चाबुक भी है।

केस 1: 20 वर्षीय म्यूजिक ऑडिटर सोनी को मिलेगा 65 लाख का मुआवजा

हादसे का विवरण: बक्सा थाना क्षेत्र के ब्राह्मणपुर बरखंडी निवासी 20 वर्षीय सोनी 16 मई 2022 को प्रयागराज से प्राइवेट बस से लौट रही थीं। सुजानगंज के पास बस चालक की घोर लापरवाही के कारण बस डिलीवरी वैन से टकरा गई। खिड़की के पास बैठी सोनी का दाहिना हाथ इस भयावह हादसे में कट गया।

पीड़िता का संघर्ष: मुंबई में म्यूजिक ऑडिटर के रूप में प्राइवेट नौकरी शुरू किए अभी महज एक महीना ही हुआ था कि इस हादसे ने उनके सपनों को छिन्न-भिन्न कर दिया।

सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक आदेश का अनुपालन: अधिवक्ता हिमांशु श्रीवास्तव ने अदालत में मजबूती से पक्ष रखते हुए तर्क दिया कि सोनी न केवल कामकाजी थीं, बल्कि पूरा घर भी संभालती थीं। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक युगांतरकारी फैसले में गृहिणी को 'राष्ट्र निर्माता' करार देते हुए उनकी न्यूनतम आय 30,000 प्रतिमाह मानी थी। ट्रिब्यूनल ने इसी विधि व्यवस्था का अनुसरण करते हुए सोनी की मासिक आय 30,000 मानी और 'द न्यू इंडिया बीमा कंपनी' को मय ब्याज 65 लाख की क्षतिपूर्ति देने का आदेश दिया।

केस 2: सेल्स एग्जीक्यूटिव शिशिर चन्द्र मिश्र को 27 लाख की क्षतिपूर्ति

हादसे का विवरण: शेरवां (सिकरारा) निवासी 42 वर्षीय शिशिर चंद्र मिश्र, जो टाटा मोटर्स में सेल्स एग्जीक्यूटिव के पद पर कार्यरत हैं। 28 मार्च 2021 को मोटरसाइकिल से लौट रहे थे। सिकरारा बीबीपुर के पास अनियंत्रित रोडवेज बस के चालक ने उन्हें जोरदार टक्कर मार दी, जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गये।

लंबा इलाज और कानूनी लड़ाई: शिशिर के भाई अधिवक्ता अभिषेक मिश्रा की प्राथमिकी (FIR) के आधार पर मुकदमा दर्ज हुआ। महीनों चले इलाज के बाद अदालत में परिवहन निगम की घोर उपेक्षा साबित हुई।

अदालत का फैसला: ट्रिब्यूनल ने रोडवेज बस चालक की लापरवाही पाते हुए उत्तर प्रदेश सड़क परिवहन निगम को निर्देश दिया कि वह घायल शिशिर को ब्याज सहित ₹27 लाख की क्षतिपूर्ति राशि 60 दिनों के भीतर दे।

समाज के हित में इस फैसले का बड़ा संदेश

महिलाओं व गृहिणियों के श्रम को सम्मान: अदालत का यह फैसला स्पष्ट करता है कि घर संभालने वाली महिलाओं और युवतियों का योगदान किसी भी दफ्तर में काम करने वाले व्यक्ति से कम नहीं है।

लापरवाह चालकों और एजेंसियों पर कसता शिकंजा: बस मालिकों, चालकों और बीमा कंपनियों को अब यह समझना होगा कि सड़क पर बरती गई एक छोटी सी लापरवाही किसी का जीवन बर्बाद कर सकती है और इसका भारी आर्थिक खामियाजा भुगतना पड़ेगा।

सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूकता: यह खबर आम जनता को उनके कानूनी अधिकारों के प्रति जागरूक करती है कि दुर्घटना की स्थिति में सही कानूनी लड़ाई लड़कर न्याय और उचित मुआवजा हासिल किया जा सकता है।


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