सौरभ सिंह
सिकरारा, जौनपुर। श्री पावन महावीर धाम अजोशी लंबे समय से श्रद्धालुओं की आस्था और विश्वास का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। मान्यता है कि जो भक्त सच्ची श्रद्धा, विश्वास और भक्ति भाव से बजरंगबली के दरबार में अपनी मनोकामना लेकर पहुंचते हैं, उन्हें हनुमान जी की कृपा प्राप्त होती है। धाम पर आने वाले श्रद्धालु दर्शन-पूजन के साथ पवित्र स्नान कर भगवान हनुमान का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं और सुख, शांति एवं आरोग्यता की कामना करते हैं।
त्रेतायुग से जुड़ी मान्यता
धाम से जुड़ी पुरानी लोक मान्यता के अनुसार जब भगवान श्रीराम और रावण के बीच युद्ध चल रहा था और लक्ष्मण जी मूर्छित हो गए थे, तब हनुमान जी संजीवनी बूटी लेने के लिए हिमालय की ओर गए थे। वापस लौटते समय भरत जी द्वारा चलाए गए बाण के कारण हनुमान जी के घायल होकर इस स्थान पर गिरने की मान्यता बताई जाती है। स्थानीय बुजुर्गों और पुरखों से चली आ रही मान्यताओं के अनुसार, इसी पावन धरती पर बजरंग बली की दिव्य उपस्थिति हुई और यहां स्वयंभू हनुमान प्रतिमा के प्रकट होने की कथा कही जाती है। श्रद्धालुओं में यह विश्वास आज भी गहराई से कायम है कि यह धाम प्राचीन काल से ही हनुमान भक्ति का पवित्र केंद्र रहा है।
बुढ़वा मंगल पर उमड़ता है आस्था का सैलाब
नाग पंचमी के बाद पड़ने वाले मंगलवार को यहां बुढ़वा मंगल के रूप में विशेष धार्मिक उत्सव मनाने की परंपरा है। इस अवसर पर धाम में विशेष श्रृंगार, पूजन, अर्चन और आरती का आयोजन किया जाता है। सुबह से ही दूर-दराज के गांवों और आसपास के क्षेत्रों से श्रद्धालुओं का पहुंचना शुरू हो जाता है। भक्त बजरंग बली को पूरी, मिठाई, फल सहित अन्य प्रसाद श्रद्धा के साथ अर्पित करते हैं। मंदिर परिसर में भक्ति गीत, जय श्रीराम और जय बजरंग बली के जयकारों से वातावरण भक्तिमय हो उठता है। कई श्रद्धालु अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए विशेष पूजा-अर्चना करते हैं और परिवार की सुख-समृद्धि तथा स्वास्थ्य की प्रार्थना करते हैं।
श्रद्धालुओं के लिये विशेष महत्व
श्री पावन महावीर धाम अजोशी केवल एक धार्मिक स्थल ही नहीं, बल्कि क्षेत्र के लोगों की आस्था, परंपरा और आध्यात्मिक विश्वास से जुड़ा हुआ पवित्र स्थान है। यहां आने वाले श्रद्धालु भगवान हनुमान के दर्शन कर अपने मन को शांति और सकारात्मक ऊर्जा से भरने का अनुभव करते हैं। धाम के प्रधान पुजारी अरविंद मिश्र एवं पुजारी शुभम मिश्रा के अनुसार, बुढ़वा मंगल के महापर्व पर बड़ी संख्या में भक्त दर्शन-पूजन, श्रृंगार, प्रसाद और फल अर्पित करने के लिए पहुंचते हैं। उनका कहना है कि श्रद्धा और विश्वास के साथ बजरंगबली के चरणों में आने वाले भक्तों पर प्रभु की कृपा बनी रहती है। बुढ़वा मंगल पर अजोशी धाम में श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिलता है। भक्तों के लिए यह दिन केवल पूजा का अवसर नहीं, बल्कि अपने आराध्य बजरंग बली के प्रति विश्वास और समर्पण प्रकट करने का पावन पर्व बन जाता है।
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