ठेकेदार पर ठीकरा फोड़कर रसूखदारों को बचाया
सोनू गुप्ता
जौनपुर। जनपद के नगर पंचायत मड़ियाहूं से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है जहां प्रशासन की बड़ी लापरवाही और लीपापोती का पर्दाफाश हुआ है। वार्ड काजीकोट में जनता की भलाई के लिये लगायी जा रही स्ट्रीट लाइट (प्रकाश व्यवस्था) के सरकारी फाउंडेशन को तोड़ दिया गया। इस मामले में जब शिकायत दर्ज की गयी तो नगर पंचायत के कर्मचारियों ने जांच के नाम पर जनता की आंखों में धूल झोंकते हुये सारा दोष एक अज्ञात ठेकेदार के सिर मढ़ दिया।
क्या कहती है नगर पंचायत की झूठी रिपोर्ट?
शिकायत संख्या 4001942607428 के सिलसिले में नगर पंचायत के लिपिक और जांच अधिकारी अमरनाथ विश्वकर्मा द्वारा एक रिपोर्ट तैयार की गयी। इस रिपोर्ट में यह दावा किया गया कि वार्ड कजियाना में स्ट्रीट लाइट लगाने के लिए ठेकेदार ने फाउंडेशन बनाया था जिससे रास्ते में वाहन निकलने में दिक्कत हो रही थी। रिपोर्ट में यह भी लिख दिया गया कि स्थानीय लोगों की शिकायत पर खुद ठेकेदार ने ही उस फाउंडेशन को तोड़ दिया है। इस आधार पर अधिकारी ने मामले को खत्म करने की कोशिश किया।
असली सच ठेकेदार ने नहीं, बल्कि इन 4 लोगों ने तोड़ा
शिकायतकर्ता हिमांशु विश्वकर्मा सहित स्थानीय लोगों का कहना है कि नगर पंचायत की यह रिपोर्ट 100 फीसदी झूठी और मनगढ़ंत है। सच्चाई यह है कि सरकारी सम्पत्ति को किसी ठेकेदार ने नहीं तोड़ा, बल्कि इसे 4 दबंग लोगों ने मिलकर तहस-नहस किया है। जिन लोगों पर आरोप है, उनमें एजाज कुरैशी (सभासद के देवर), डा. रोहित विश्वकर्मा (पुत्र स्व. विजय प्रकाश विश्वकर्मा), शैलेश विश्वकर्मा (पुत्र स्व. ओम प्रकाश विश्वकर्मा) एवं अजय मौर्या (पुत्र स्व. रामबली मौर्या) हैं। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब इन चारों आरोपियों के नाम सामने आ रहे हैं तो नगर पंचायत के अधिकारी इन्हें क्यों बचा रहे हैं? इसके पीछे क्या प्रशासनिक मिलीभगत है, यह जांच का विषय है।
अकाट्य सबूत मौजूद, फिर भी कार्यवाही से आंखें मूंद रहा प्रशासन
शिकायतकर्ता के पास इस बात के पुख्ता सबूत मौजूद हैं कि यह तोड़—फोड़ किसने की है। घटनास्थल के वीडियो, तस्वीरें और सीसीटीवी फुटेज साफ तौर पर इन चारों आरोपियों की करतूत को बयां कर रहे हैं। इसके अलावा मौके पर स्थिति यह है कि उस रास्ते से वाहन आने-जाने में कोई भी रुकावट या अवरोध पैदा नहीं हो रहा था। इसके बावजूद अधिकारियों ने बिना किसी ठोस पड़ताल के फर्जी रिपोर्ट लगाकर मामला दबा दिया।
जनता में भारी गुस्सा, उठ रही उच्चस्तरीय जांच की मांग
प्रशासन की इस तरह की कार्यशैली से स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है। जनता पूछ रही है कि यदि दबंग लोग खुलेआम सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुँचाएंगे और अधिकारी उनका साथ देंगे तो क्षेत्र में कानून का राज कैसे बचेगा? पीड़ित पक्ष और जागरूक नागरिकों ने जिला प्रशासन के उच्च अधिकारियों से मांग किया कि इस फर्जी निस्तारण रिपोर्ट की तुरंत उच्चस्तरीय जांच कराई जाए। साथ ही सरकारी सम्पत्ति को नुकसान पहुँचाने वाले इन चारों आरोपियों और उन्हें बचाने वाले भ्रष्ट जिम्मेदार कर्मियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाय, ताकि भविष्य में कोई भी इस तरह की मनमानी करने की हिम्मत न जुटा सके।
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