सेनेटरी पैड निर्माण एवं पैकेजिंग व्यवसाय से बदली जिन्दगी
वार्षिक आय 60 हजार रूपये से बढ़कर हुई 1.50 लाख
जौनपुर। कभी परिवार की सीमित आमदनी के बीच बच्चों की जरूरतों और बेहतर भविष्य की चिंता करने वाली शाहगंज विकास खण्ड की ग्राम पंचायत जैगहा निवासी ज्योति ज्वाला ने आज अपनी मेहनत, हुनर और आत्मविश्वास से सफलता की नयी इबारत लिखी है। स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के बाद मिले प्रशिक्षण और आर्थिक सहयोग ने उन्हें अपने पैरों पर खड़े होने का अवसर दिया। आज वह स्वयं का सेनेटरी पैड निर्माण एवं पैकेजिंग व्यवसाय संचालित कर न केवल अपनी आय बढ़ा रही हैं, बल्कि आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ते हुए अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा बन रही हैं।
बता दें कि ज्योति उजाला आजीविका स्वयं सहायता समूह से जुड़ीं। समूह से जुड़ने के बाद उन्हें स्वरोजगार के अवसरों के बारे में जानकारी मिली और प्रशिक्षण के माध्यम से अपने हुनर को व्यवसाय में बदलने का रास्ता मिला। समूह की गतिविधियों को आगे बढ़ाने के लिए मान्या प्रेरणा ग्राम संगठन का गठन किया गया जिससे महिलाओं को सामूहिक रूप से आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने में मदद मिली।
ज्योति बताती हैं कि पहले उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती आर्थिक संसाधनों की थी। कुछ करने की इच्छा और मेहनत करने का जज्बा तो था लेकिन व्यवसाय शुरू करने के लिए आवश्यक पूंजी उपलब्ध नहीं थी। ऐसे समय में स्वयं सहायता समूह और आजीविका मिशन का सहयोग उनके लिए नई उम्मीद लेकर आया। अपने व्यवसाय को शुरू करने के लिये ज्योति ने स्वयं सहायता समूह से 3.50 लाख रुपये का आंतरिक ऋण प्राप्त किया। इसके अतिरिक्त ग्राम संगठन की आजीविका निधि से 2 लाख रुपये की धनराशि उपलब्ध हुई। कुल 5.50 लाख रुपये के वित्तीय सहयोग का उपयोग उन्होंने सेनेटरी पैड निर्माण, सेनेटाइजिंग एवं पैकेजिंग मशीन से संबंधित व्यवसाय शुरू करने में किया।
अब ज्योति का लक्ष्य अपने व्यवसाय को और बड़े स्तर पर ले जाना है। वह सेनेटरी पैड निर्माण एवं पैकेजिंग का विस्तार कर अपनी आय बढ़ाने के साथ अन्य ग्रामीण महिलाओं को भी रोजगार से जोड़ना चाहती हैं। ज्योति की कहानी यह साबित करती है कि ग्रामीण महिलाओं में प्रतिभा और मेहनत की कोई कमी नहीं है। आवश्यकता है तो केवल सही अवसर, मार्गदर्शन, प्रशिक्षण और आर्थिक सहयोग किया। स्वयं सहायता समूह ने ज्योति को वह मंच दिया जहां उन्होंने अपनी मेहनत को अवसर में और अवसर को सफलता में बदल दिया। आज ज्योति केवल अपने परिवार की आर्थिक स्थिति बदलने वाली महिला नहीं, बल्कि अपने गांव की अन्य महिलाओं के लिए आत्मनिर्भरता की प्रेरणा बन चुकी हैं।
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