20 साल तक जेल की चक्की पीसेगा कुकर्मी
हिमांशु श्रीवास्तव
जौनपुर। बचपन को अपनी हवस की आग में झुलसाने वाले नरपिशाचों के लिए जौनपुर की अदालत ने एक ऐसा ऐतिहासिक और कड़ा फैसला सुनाया है जिससे पूरे इलाके के अपराधियों की रूह कांप गई है। खुटहन थाना क्षेत्र में एक 11 साल के अबोध बच्चे का जीवन तबाह करने वाले कुकर्मी नितिन तिवारी निवासी मेढ़ा थाना खुटहन को अपर सत्र न्यायाधीश ने उसके पापों की अंतिम सजा सुना दी है। कोर्ट ने दोषी नितिन को 20 वर्ष के कठोर कारावास (सश्रम जेल) और 50,500 रुपये के भारी अर्थदंड की सजा से दंडित किया है। अगर इस दरिंदे ने जुर्माना नहीं भरा तो इसे 6 महीने और अतिरिक्त जेल की काल कोठरी में सड़ना होगा।
सुनसान नाले के पास चीखता रहा मासूम, हैवानियत की हदें पार कर गया दरिन्दा
यह रोंगटे खड़े कर देने वाली खौफनाक वारदात 4 अप्रैल 2021 की है जिसने इंसानियत को शर्मसार कर दिया था। पीड़ित मासूम सिर्फ 11 साल का था और कक्षा 5 का छात्र था। घटना वाले दिन शाम करीब 5 बजे आरोपी नितिन तिवारी ने उस बच्चे की बेबसी का फायदा उठाया। वह बहला-फुसलाकर मासूम को गांव के ही एक सुनसान नाले की तरफ ले गया। वहां चीखते-चिल्लाते और रहम की भीख मांगते बच्चे की एक न सुनी गई और आरोपी ने उसके साथ अप्राकृतिक दुराचार (कुकर्म) कर मर्यादाओं की सारी सीमाएं पार कर दीं।
जब घर लौटा लाचार पिता, रोते हुये मां-बेटे ने बयां की रूह कंपाने वाली दास्तान
शाम को जब पीड़ित का पिता काम से वापस घर लौटा तो वहां का मंजर देखकर उसके पैरों तले जमीन खिसक गई। घर में उसकी पत्नी और लहूलुहान मासूम बेटा फूट-फूटकर रो रहे थे। मां की गोद में सिर छिपाकर सिसकते हुए मासूम ने अपने साथ हुई उस खौफनाक दरिंदगी की एक-एक बात पिता को बताई।
इंसाफ मांगने गये पिता को दौड़ाकर पीटने की कोशिश
कलेजे पर पत्थर रखकर जब पीड़ित पिता लोक-लाज भूलकर आरोपी नितिन तिवारी के घर उलाहना (शिकायत) देने पहुंचा तो वहां शर्मिंदा होने के बजाय आरोपी के परिवार वाले पीड़ित पिता को सरेआम गालियां दीं एवं जान से मारने की धमकी देते हुये लाठी-डंडे लेकर मारने के लिए दौड़ा लिया।
पुलिस की तफ्तीश एवं अदालत का कड़ा प्रहार
दबंगों की धमकी से डरे बिना पीड़ित परिवार पुलिस के पास पहुंचा। खुटहन पुलिस ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए तत्परता से जांच की और कोर्ट में पुख्ता सबूतों के साथ चार्जशीट दाखिल की। अदालत के भीतर दोनों पक्षों के वकीलों के बीच तीखी बहस हुई। बचाव पक्ष ने आरोपी को बचाने की हर मुमकिन कोशिश की लेकिन पीड़ित बच्चे के आंसू और अकाट्य गवाहों के सामने आरोपी का झूठ ताश के पत्तों की तरह ढह गया।
फैसला: समाज में ऐसे दरिन्दों के लिये कोई जगह नहीं
अपर सत्र न्यायाधीश ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और सबूतों को परखने के बाद नितिन तिवारी को इस घिनौने अपराध का मुख्य दोषी पाया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि बच्चों के साथ ऐसी हैवानियत समाज के माथे पर कलंक है। अदालत ने आरोपी पर तनिक भी रहम न दिखाते हुए उसे 20 साल के लिए जेल की चक्की पीसने का हुक्म सुनाकर सीधे जेल भेज दिया। इस बड़े फैसले के बाद पीड़ित परिवार की आंखों से छलकते आंसुओं में इंसाफ का सुकून साफ देखा जा सकता है जबकि पूरे इलाके में इस कड़े फैसले की तारीफ हो रही है।
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