टावर से कूदकर युवक की मौत पर प्रशासन की भूमिका कठघरे में: ऊदल यादव
जौनपुर। बक्शा क्षेत्र के उतरीजपुर गाँव में टावर से कूदकर श्रीप्रकाश यादव की आत्महत्या की खबर पर शुक्रवार को परिजनों से मिलने पहुंचे कम्युनिस्ट नेता ऊदल यादव और उनके साथियों को पीड़ित परिवार से मिलने से रोक दिया गया। पीड़ित के घर और आस-पास पुलिस का कड़ा पहरा लगा दिया गया है।
कम्युनिस्ट नेता ने इस पूरे मामले में प्रशासनिक कार्यप्रणाली और राजस्व व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किये हैं। इस मामले में तीखी प्रक्रिया व्यक्त करते हुए ऊदल यादव ने कहा कि जिस परिवार की जमीन का विवाद 10-12 वर्षों से चल रहा था जो लगातार तहसील और कलेक्ट्रेट के चक्कर काट रहा था, उसकी निष्पक्ष सुनवाई आखिर क्यों नहीं हुई? यदि समय रहते राजस्व विभाग ने पारदर्शी तरीके से विवाद का निस्तारण किया होता तो शायद एक युवक को अपनी जान नहीं गंवानी पड़ती।
उन्होंने कहा कि श्रीप्रकाश यादव सुबह 7 बजे टावर पर चढ़ा और करीब 7 घंटे तक पूरा प्रशासनिक अमला नीचे मौजूद रहा। तहसीलदार, पुलिस, फायर ब्रिगेड सहित अन्य अधिकारी मौके पर थे, फिर भी युवक को सुरक्षित नीचे उतारने का प्रभावी प्रयास क्यों नहीं किया गया? केवल समझाने भर से प्रशासन अपनी जिम्मेदारी से मुक्त नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि घटना दोपहर की भीषण गर्मी में हुई, जब तापमान 42-43 डिग्री सेल्सियस के ऊपर था। ऐसे समय में लोहे का टावर तवे की तरह तप रहा होगा। 7 घंटे तक उस पर बैठे युवक की मानसिक और शारीरिक स्थिति क्या रही होगी, यह आसानी से समझा जा सकता है। इसके बावजूद प्रशासन यह कैसे मानकर बैठा रहा कि युवक सामान्य स्थिति में खुद नीचे उतर आएगा?
उन्होंने आरोप लगाया कि परिवार लगातार दूसरे कानूनगो और लेखपाल से दोबारा सीमांकन कराने की मांग कर रहा था लेकिन उनकी बात गम्भीरता से नहीं सुनी गई। यदि पीड़ित परिवार की शिकायतों पर समय रहते निष्पक्ष कार्रवाई होती तो यह नौबत नहीं आती। आज वह अपने साथियों के साथ पीड़ित परिवार से मिलने गांव पहुंचे थे लेकिन गांव को पुलिस छावनी में बदल दिया गया है। भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है और किसी को भी परिवार से मिलने नहीं दिया जा रहा। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर प्रशासन किस बात से डर रहा है? यदि जांच निष्पक्ष है तो लोगों और जनप्रतिनिधियों को पीड़ित परिवार से मिलने से क्यों रोका जा रहा है? उन्होंने कहा कि श्रीप्रकाश यादव अपनी जमीन के लिए वर्षों से न्याय मांग रहा एक सामान्य नागरिक था। उसकी मौत प्रशासनिक संवेदनहीनता और अविश्वास की दुखद परिणति है। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग किया।
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