Jaunpur News: मरणासन्न हालत तक पहुंचे मरीज को डा. मंजू ने दिया जीवनदान

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Jaunpur News: मरणासन्न हालत तक पहुंचे मरीज को डा. मंजू ने दिया जीवनदान


डायलिसिस की थी जरूरत, मगर डा. यादव ने दवा से ही किया स्वस्थ

आश्चर्य: जन्म से ही बालक के पास है एक किडनी

शुभांशू जायसवाल

जौनपुर। जन्म से ही एक किडनी के सहारे जी रहे बालक की जान जाते-जाते बच गयी। बुखार से शुरू हुई बीमारी मरणासन्न हालत तक पहुंचा दी। कई अस्पतालों से रिफर इस बालक को नईगंज स्थित बंशराजी हार्ट एवं चाइल्ड मल्टी स्पेशलिटी हॉस्पिटल की प्रख्यात बाल रोग विशेषज्ञ डा. मंजू यादव ने अपने उपचार से जीवनदान दे दिया।

बता दें कि जीवन की आंतिम सांस लेते माँ की गोद में अस्पताल पहुंचा बालक डिस्चार्ज के समय जब खुद चलकर निकला तो परिजन की आँखों से खुशी के आंसू छलक पड़े। वह खुलकर एक—दूसरे से डा. मंजू की प्रशंसा करते देखे गए। बताया जाता है कि जनपद प्रतापगढ़ के पट्टी रायपुर निवासी श्याम सिंह के 10 वर्षीय पुत्र खुशहाल को पिछले माह अचानक बुखार आ गया। मेडिकल से दवा लेकर दिया गया परन्तु आराम नहीं मिला। हालत बिगड़ने पर मछलीशहर के एक प्राइवेट अस्पताल में भर्ती कराया गया। वहां आराम की बजाय हालत और खराब हो गयी। इसके बाद जिले के और कई अस्पतालों में दिखाया गया परन्तु बिगड़ी दशा देख किसी ने नहीं लिया। 24 मार्च की रात्रि लगभग 12 बजे बंशराजी हॉस्पिटल की जानी-मानी चाइल्ड स्पेशलिस्ट के पास ले जाया गया। उस समय वह बुखार से तप रहा था। सांस नहीं ले पा रहा था। पेशाब नहीं हो रही थी। पल्स कम था। नब्ज कम आ रही थी। वह पूरी तरह बेहोश था।

बताया गया कि डा. मंजू ने रिस्क लेते हुए भर्ती कर लिया। आवश्यक जांच कराने पर पता चला कि जन्म से ही उसके पास एक ही किडनी है। मवाद भर जाने एवं इन्फेशन के चलते वह भी काम नहीं कर रही है। समय से समुचित उपचार न होने से हालत नाजुक हो गयी है। डा. मंजू द्वारा सर्वप्रथम आक्सीजन पर रखकर उपचार शुरू किया गया। दवा के असर से दूसरे दिन होश आया तो लेकिन पेशाब के रास्ते मवाद आने लगा। इसके बाद बंद आँखे खुल गयी लेकिन हालत में संतोषजनक सुधार नहीं हुआ। ऐसे में उसे डायलिसिस की जरूरत थी लेकिन बेहतर उपचार के जरिए यमराज के यहां से भी जिन्दगी वापस ले आने वाली डा. मंजू ने दवा से ही कवर कर लिया।

परिणाम यह हुआ कि तीसरे दिन पेशाब साफ होने लगी और वह खाने भी लगा। इसके बाद ईश्वर का शुक्र कहे या डा. मंजू के हाथों का कमाल उसकी हालत में तेजी से सुधार होने लगा। पांचवें दिन बेड से उठकर चलने लगा एवं बुखार आना बंद हो गया। जब दोबारा अल्ट्रासाउंड कराया गया तो इन्फेक्शन कम था। पूरी तरह स्वास्थ्य में सुधार होने पर 4 अप्रैल को उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गयी। इस बावत पूछे जाने पर गोल्ड मेडलिस्ट डा. मंजू यादव ने बताया कि अगर किसी बच्चे को दो दिन से ज्यादा बुखार हो, पेशाब में दिक्कत हो, पेशाब कम हो रही है अथवा बूंद-बूंद हो रही है या जलन है तो इसे हल्के में नहीं लेना चाहिये, क्योंकि यह गंभीर इन्फेक्शन के लक्षण है। इससे किडनी खराब होने से जान भी जा सकती है, इसलिये समय रहते किसी अच्छे बाल रोग विशेषज्ञ को दिखाएं जिससे समय रहते जान बचायी जा सके। बच्चे के उपचार में डा. मंजू यादव के साथ अस्पताल के वरिष्ठ फिजिशियन एवं डीएम कार्डियोलॉजी डा. अवधेश यादव का भी योगदान सराहनीय रहा।

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