सोनू गुप्ता
मड़ियाहूं, जौनपुर। सद्गुरु से बड़ा कोई हितैषी संसार में नहीं है। किसी भी तत्वदर्शी महापुरुष की शरण में रहकर भजन करना कल्याणकारी है। उक्त बातें स्वामी श्री परमहंस अड़गड़ानंद महाराज जी के शिष्य नारद महाराज ने परमहंस आश्रम सिऊरा में श्रद्धालु भक्तों को संबोधित करते हुए कही। इसी क्रम में उन्होंने आगे कहा कि गृहस्थ आश्रम से ही भजन की शुरुआत होती है। गृहस्थ आश्रम में अपने परिवार के साथ रहकर उस परमात्मा के लिए जरूर समय निकाले जिसने हमें अनमोल जीवन दिया है। संसार में जितने भी ऋषि महर्षि महापुरुष हुए हैं, सभी गृहस्थ आश्रम से ही होकर निकले हैं, इसलिए आप लोग भी जहां पर हैं, वहीं से अपनी पारिवारिक जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हुए ईश्वर के चरणों में अपने को समर्पित करें। ओम, राम, शिव दो ढाई अक्षर का नाम जो भी आपको अच्छा लगे, उस नाम को पढ़कर सुबह—शाम नियमित स्मरण मनन करते रहें, क्योंकि बड़े भाग्य मानुष तन पावा। सुर दुर्लभ सद ग्रंथ निगावा यथार्थ गीता रामचरित मानस का श्रवण करें। स्वयं पढ़ें। कीर्तन करें। सत्संग करें। परमात्मा आप सबका कल्याण करेगा। इस अवसर पर पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष राज बहादुर यादव, रमेश शर्मा, प्रमोद मिश्रा, आचार्य विनय दुबे, जैनेंद्र दुबे एडवोकेट, प्यारे लाल शर्मा, राधाकृष्ण शर्मा एडवोकेट सहित तमाम लोग उपस्थित रहे।
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