बदलापुर, जौनपुर। भारतीय संस्कृति में विवाह एक संस्कार है। उक्त बातें श्री रामजानकी मन्दिर लेदुका बाजार के प्रांगण में आयोजित श्री मद्भभागवत महापुराण सप्ताह ज्ञान यज्ञ एवं रामकथा के छ्ठवें दिन वाराणसी से पधारे मानस कोविद डा. मदन मोहन मिश्र ने कही।
इसी क्रम में रूक्मिणी विवाह की चर्चा करते हुये व्यास जी ने कहा कि जीव रुपी पिता जब नारायण रुपी वर का चरण धोता है तो अहंकार समाप्त होता है और ममता रुपी बेटी का हाथ समर्पित करता है तो ममता समर्पित हो जाती है तो विवाह के माध्यम से जीव ब्रम्ह का साक्षात्कार हो जाता है। हमें सत्कर्म तत्काल करना चाहिए और संघर्ष को कल पर टाल देना चाहिये।
साथ ही गज ग्राह प्रसंग की चर्चा करते हुये कहा कि भगवान अपने दास की मुक्ति बाद में करते हैं किन्तु दासानुदास की मुक्ति पहले करते हैं। गोपी गीत की चर्चा करते हुये कहा कि गोपियों को अपनी मृत्यु का कष्ट नहीं था, बल्कि मृत्यु का कलंक उनके प्रेमास्पद कन्हैया श्री कृष्ण को न लगे। वाराणसी से पधारीं मानस कोकिला डा. सुधा पाण्डेय ने सीताराम विवाह प्रसंग की चर्चा करके लोगों को मंत्र—मुग्ध कर दिया। इस अवसर पर भारी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
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