प्रतिबन्धित मांझा बना जानलेवा, सरकार बनाये कठोर कानून: विकास तिवारी
मुख्यमंत्री से अलग एवं कठोर कानून बनाने की उठी मांग
जौनपुर। प्रतिबंधित चाइनीज, नायलान, सिंथेटिक एवं नॉन-बायोडिग्रेडेबल मांझे से लगातार हो रही मौतों और गंभीर दुर्घटनाओं को लेकर अधिवक्ता विकास तिवारी, अतुल सिंह एवं डा. अब्बासी के नेतृत्व में जिलाधिकारी जौनपुर के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजकर प्रतिबंधित मांझे के विरुद्ध कठोर एवं प्रभावी कानून बनाये जाने की मांग की गई। ज्ञापन के माध्यम से कहा गया कि पतंग उड़ाना हमारी परम्परा एवं संस्कृति का हिस्सा है लेकिन जानलेवा मांझा अब आम नागरिकों के जीवन के लिए गम्भीर खतरा बन चुका है। राष्ट्रीय हरित अधिकरण द्वारा 11 जुलाई 2017 को नायलान, सिंथेटिक एवं गैर-जैव अपघटनीय मांझे के निर्माण, बिक्री, भंडारण, खरीद एवं उपयोग पर रोक के स्पष्ट निर्देश दिए जा चुके हैं। इसके बावजूद प्रतिबंधित मांझे की बिक्री और उपयोग पर पूरी तरह रोक नहीं लग पा रही है।
ज्ञापन में जौनपुर की घटनाओं का उल्लेख करते हुए बताया गया कि 11 दिसम्बर 2025 को शिक्षक संदीप तिवारी तथा 14 जनवरी 2026 को डा. समीर हाशमी की प्रतिबंधित मांझे से गर्दन कटने के कारण मृत्यु हो गई। पिछले 10 महीने में दो दर्जन से अधिक लोग मांझा से गम्भीर रूप से चोटिल हो चुके हैं। वहीं 6 सितम्बर 2026 को सुजल मौर्य एवं उनके भाई सानू मौर्य भी प्रतिबंधित मांझे की चपेट में आकर गम्भीर रूप से घायल हुये हैं।
ज्ञापनकर्ताओं ने कहा कि 12 जनवरी 2026 को संबंधित अधिकारियों को प्रतिबंधित मांझे के सम्बन्ध में विधिवत नोटिस दिए जाने के बावजूद दो दिन बाद ही डॉ. समीर हाशमी की मृत्यु होना अत्यन्त गम्भीर विषय है। जिलाधिकारी द्वारा भी प्रतिबंधित मांझे के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं लेकिन लगातार हो रही घटनाएं बताती हैं कि केवल कागजी आदेश और मौसमी अभियान पर्याप्त नहीं हैं।
श्री तिवारी ने कहा कि हमारी लड़ाई पतंग उड़ाने की परंपरा के विरुद्ध नहीं, बल्कि उस जानलेवा मांझे के विरुद्ध है जो सड़क पर चलते किसी निर्दोष नागरिक की जान ले सकता है। पतंग उड़ती रहे लेकिन किसी की जिंदगी न कटे। ज्ञापन में प्रतिबंधित मांझे के निर्माण, परिवहन, बिक्री, भंडारण और उपयोग पर कठोर दंड का प्रावधान करने, इसके पूरे आपूर्ति तंत्र की जांच कराने, ऑनलाइन बिक्री पर रोक लगाने तथा प्रत्येक थाना क्षेत्र में स्थायी निगरानी व्यवस्था बनाने की मांग की गई है।
उसी क्रम में अतुल सिंह ने कहा कि अब किसी अगली मौत का इंतजार नहीं किया जा सकता। सरकार को प्रतिबंधित मांझे के विरुद्ध निर्णायक कार्रवाई करते हुए नागरिकों के जीवन की सुरक्षा सुनिश्चित करनी होगी। उक्त अवसर पर डा. अब्बासी, अंकित यादव, आशीष शुक्ल, सुधांशू सिंह, रंजीत यादव, भैया लाल यादव, देवेश मौर्य, नीरज पाठक सहित तमाम लोग उपस्थित रहे।
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