अजय पाण्डेय
जौनपुर। आज अगर किसी से पूछा जाए कि अंग्रेजी में कितने अक्षर होते हैं तो तुरंत जवाब आएगा- 26 लेकिन अगर वही पूछा जाए कि हिंदी में कितने अक्षर होते हैं तो लोग दाएं-बाएं झांकने लगते हैं। वर्तमान में हिंदी की यही दशा है। उक्त विचार सिविल लाइन स्थित पवन प्लाजा होटल के सभागार में हिंदी दिवस पर आयोजित संगोष्ठी में बतौर मुख्य अतिथि अंतरराष्ट्रीय साहित्यकार व पूर्वांचल विश्वविद्यालय की नागरी लिपि परिषद के अध्यक्ष डॉ. ब्रजेश यदुवंशी ने व्यक्त किया।
साथ ही आगे ने कहा कि नई पीढ़ी को हिंदी के विकास के लिए आगे आना होगा। हिंदी के साथ एक-दो अन्य भारतीय भाषाओं का भी अध्ययन जरूरी है जिससे देश में भाषाई रूप से राष्ट्रीय एकीकरण की भावना पनपेगी। गोष्ठी की अध्यक्षता कर रहे प्रेम स्वरूप श्रीवास्तव ने कहा कि हम सबको हिंदी का सही ज्ञान होना जरूरी है। हमारे राष्ट्र की पहचान हिंदी से ही है।
इसके पहले डॉ. यदुवंशी के नेतृत्व में हिंदी के सम्मान में स्लोगन लिखी तख्तियां लेकर मुख्य चौराहे और प्रतिष्ठानों पर प्रदर्शन किया गया। तख्तियों पर लिखा था- 'हिन्दी है हमारी शान, हिन्दी से हिन्दुस्तान', 'जन-जन की भाषा है हिन्दी, भारत की आशा है हिन्दी', 'एकता की जान है हिन्दी, भारत की पहचान है हिन्दी'।
इस अवसर पर शिवम सिंह, चंदन सिंह गोपाल, मोहम्मद शरीफ अंसारी, डॉ. श्रीराम यादव, नीरज सिंह, शैलेंद्र सिंह, अजय कुमार, शनि गौतम, सूरज निषाद, अमर शिवांशु सिंह, गगन सिंह, विशाल मौर्य, राहुल प्रजापति, आनंद मोदनवाल, अशोक यादव, मोहम्मद फैयाज सहित तमाम लोग मौजूद रहे। गोष्ठी का संचालन अनिल केशरी ने किया।
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