Jaunpur News: गन्दी राजनीति को सुधारने के लिये राजनीतिक, कानूनी और संवैधानिक सुधारों पर काम करने के लिये हुआ लीडरशिप प्रशिक्षण

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Jaunpur News: गन्दी राजनीति को सुधारने के लिये राजनीतिक, कानूनी और संवैधानिक सुधारों पर काम करने के लिये हुआ लीडरशिप प्रशिक्षण


बलराम सिंह यादव इण्टर कॉलेज में हुआ पुनर्जागरण व्याख्यान

शुभांशू जायसवाल

जौनपुर। देश भर में पुनर्जागरण यात्रा पर निकले राजनीतिक एवं आर्थिक सुधारों तथा वैज्ञानिक अध्यात्म पर दर्जनों पुस्तकों के लेखक, चिंतक एवं वक्ता श्री विश्वात्मा ने देश में व्यापक सामाजिक, राजनीतिक, कानूनी और संवैधानिक सुधारों पर काम करने के लिए लोगों से आगे आने की अपील किया। उन्होंने अपने व्याख्यान के दौरान 15-सूत्रीय पुनर्जागरण सुधार प्रस्ताव प्रस्तुत किया। देश की गंदी राजनीति को सुधारने के लिए इन 15-सूत्रीय पुनर्जागरण कार्यक्रमों को लागू करना अपरिहार्य है। श्री विश्वात्मा कलीचाबाद स्थित बलराम सिंह यादव इंटर कॉलेज के सभागार में आयोजित एकदिवसीय लीडरशिप प्रशिक्षण कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।

पुनर्जागरण कार्यक्रम के पहले प्रस्ताव से लोगों को परिचित कराते हुए उन्होंने कहा कि वैश्वीकरण के इस युग में लोगों को कानूनी और संवैधानिक अधिकारों के साथ वैश्विक अधिकार भी मिलना चाहिए। इसके लिए भारत सरकार को “वैश्विक भागीदारी और शांति मंत्रालय” के नाम से एक नया मंत्रालय बनाना चाहिये जिससे श्रमिकों का पूरे विश्व में अबाध आवागमन सुनिश्चित हो सके, युद्धों पर कानूनी रोक लगाई जा सके, युद्ध छेड़ने वालों को जेल भेजा जा सके और विश्व स्तर पर भी कानून का शासन कायम किया जा सके।

दूसरे प्रस्ताव में कहा गया कि लिव-इन रिलेशन, विवाह-पूर्व शारीरिक संबंध, दाम्पत्य जीवन के बाहर शारीरिक संबंध, विवाह से पहले संतानोत्पत्ति, समलैंगिक विवाह तथा परिवार के भीतर व्यभिचार को कानूनी मान्यता देने वाले सभी कानूनों और न्यायालय के आदेशों को कानून बनाकर रद्द किया जाए। इन कृत्यों को अपराध घोषित किया जाए, ताकि परिवार संस्था की एकता, वैवाहिक मर्यादा, नैतिक संपन्नता, धार्मिक एवं सामाजिक आस्थाओं तथा भारतीय सभ्यता-संस्कृति की मूल भावना को सुरक्षित रखा जा सके।

तीसरे प्रस्ताव में कहा गया कि सरकारी नौकरी पाने अथवा मशीनों और प्राकृतिक संसाधनों से पैदा हो रहे धन में अपने हिस्से का लाभांश पाने के अधिकार को मौलिक अधिकार बनाया जाय जिससे कोई भी व्यक्ति अदालत में मुकदमा दायर कर सरकारी नौकरी प्राप्त कर सके। जब तक सरकारी नौकरी न मिले, तब तक देश की औसत आमदनी की आधी रकम, अर्थात 11,900 रुपये प्रतिमाह, दिए जाने का प्रावधान किया जाए। इसे “वोटरशिप अधिकार” बताते हुए कहा कि इसके लिए सैकड़ों सांसदों की माँग पर संसद की गोयल समिति वर्ष 2011 में ही सिफारिश कर चुकी है।

चौथे प्रस्ताव में कहा गया कि सांसदों और विधायकों के पदों पर गरीबी रेखा से नीचे (BPL) परिवारों को 25 प्रतिशत तथा गरीबी रेखा से ऊपर (APL) परिवारों को 72 प्रतिशत आरक्षण दिया जाए। आयकर देने वाले समाज का प्रतिनिधित्व इस समाज की जनसंख्या के अनुसार 3 प्रतिशत तक सीमित किया जाय जिससे गरीब और मध्यमवर्गीय लोग भी सांसद और विधायक बन सकें तथा संसद और विधानसभाओं में आर्थिक रूप से कमजोर 97 प्रतिशत समाज का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित हो सके।

पांचवें प्रस्ताव में कहा गया कि सुप्रीम कोर्ट ने SC/ST आरक्षण में OBC की तरह क्रीमी लेयर लागू करने का आदेश दिया है। चूँकि SC/ST के आर्थिक रूप से कमजोर लगभग 97 प्रतिशत परिवारों को उनकी जनसंख्या के अनुपात में सरकारी नौकरियाँ नहीं मिल पा रही हैं और संपन्न वर्ग क्रीमी लेयर का विरोध करता है, इसलिए प्रथम श्रेणी की नौकरियों को छोड़कर शेष सभी सेवाओं में क्रीमी लेयर लागू करने के लिए कानून बनाया जाए, ताकि आरक्षण का लाभ वास्तविक रूप से वंचित परिवारों तक पहुँच सके। इस अवसर पर कमलेश यादव, ओंकार सिंह यादव, नवीन कुमार, धर्मेंद्र गुप्ता सहित तमाम लोग उपस्थित रहे।

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