वाहन स्वामियों एवं मिस्त्रियों ने जतायी नाराजगी
एवरेज घटने, इंजन खराब होने एवं पेट्रोल की गुणवत्ता को लेकर उपभोक्ताओं में बढ़ी चिन्ता
सुशील स्वामी
जौनपुर। जनपद में इन दिनों एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल को लेकर वाहन स्वामियों और वाहन मिस्त्रियों के बीच असंतोष बढ़ता दिखाई दे रहा है। शहर के कई दोपहिया और चारपहिया वाहन मालिकों का दावा है कि एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल के इस्तेमाल के बाद उनके वाहनों का माइलेज (एवरेज) कम हो गया है तथा इंजन संबंधी समस्याएं बढ़ गई हैं। वहीं कई मिस्त्रियों का भी कहना है कि पहले की तुलना में इंजन खराब होने के मामले अधिक सामने आ रहे हैं।
शहर के किला रोड स्थित दोपहिया वाहन मिस्त्री सोनू का कहना है कि हाल ही में उन्होंने एक बाइक का इंजन पूरी तरह ठीक किया था लेकिन लगभग दस दिन बाद वह दोबारा खराब हो गया। उनका कहना है कि ग्राहक ने इंजन खराब होने का कारण एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल को बताया, जिससे दोनों के बीच विवाद भी हुआ और मरम्मत का भुगतान भी नहीं मिला।
वाहन मिस्त्री सुरेंद्र मौर्य का कहना है कि ग्राहकों की सबसे अधिक शिकायत माइलेज कम होने की है। उनके अनुसार कई ग्राहक पेट्रोल पंपों पर कम मात्रा में पेट्रोल दिए जाने की भी शिकायत करते हैं। उनका मानना है कि एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल के कारण भी इंजन और माइलेज प्रभावित हो रहे हैं।
इसी प्रकार शहर के अन्य मिस्त्री सानू, शाहिद, बिलाल और रामलाल ने भी दावा किया कि उनके पास आने वाले कई ग्राहकों ने इंजन की खराबी, स्टार्टिंग की समस्या, धक-धक करके वाहन बंद हो जाने तथा कार्बन जमा होने जैसी शिकायतें की हैं। उनका कहना है कि इन समस्याओं के लिए ग्राहक अक्सर एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल को जिम्मेदार बताते हैं।
कुछ वाहन स्वामियों का कहना है कि पहले उनकी बाइक 60 से 65 किलोमीटर प्रति लीटर तक का माइलेज देती थी जबकि अब वही वाहन 25 से 30 किलोमीटर प्रति लीटर तक ही चल पा रहा है। इससे उनके मासिक ईंधन खर्च में काफी वृद्धि हुई है। कई लोगों ने बताया कि पहले चार दिन तक चलने वाला 200 का पेट्रोल अब एक दिन भी पर्याप्त नहीं पड़ रहा है।
हालांकि यह उल्लेखनीय है कि भारत सरकार और तेल विपणन कंपनियों का कहना है कि निर्धारित मानकों के अनुरूप एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल सुरक्षित है तथा इसे वाहनों में उपयोग के लिए वैज्ञानिक परीक्षणों के बाद ही लागू किया गया है। यदि किसी क्षेत्र में पेट्रोल की गुणवत्ता, मिलावट या कम मात्रा में पेट्रोल दिए जाने की शिकायत है तो उसकी जांच संबंधित विभाग द्वारा की जा सकती है।
वाहन स्वामियों और मिस्त्रियों ने मांग किया कि पेट्रोल की गुणवत्ता, एथेनॉल मिश्रण के प्रभाव तथा पेट्रोल पंपों पर माप-तौल की निष्पक्ष जांच कराई जाए, ताकि उपभोक्ताओं की शंकाओं का समाधान हो सके और वास्तविक स्थिति सामने आ सके। यह रिपोर्ट स्थानीय लोगों और मिस्त्रियों के दावों पर आधारित है। यदि चाहें तो इसे और संतुलित बनाने के लिए इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम या जिला पूर्ति विभाग का पक्ष भी शामिल किया जा सकता है।
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