विभागीय कर्मचारियों पर धन मांगने का आरोप
अजय पाण्डेय
जौनपुर। उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड के विद्युत वितरण खण्ड-4 में स्थायी विद्युत विच्छेदन (पीडी) की प्रक्रिया को लेकर एक उपभोक्ता ने विभागीय कर्मचारियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उपभोक्ता का कहना है कि पीडी के लिए आवेदन एवं निर्धारित शुल्क जमा करने के लगभग छह माह बाद भी उसे अंतिम विद्युत विच्छेदन (पीडी) प्रमाण पत्र उपलब्ध नहीं कराया गया है। आरोप है कि स्थानीय लाइनमैन, जीएमटी एवं संबंधित अवर अभियंता की मिलीभगत के कारण मामले में जानबूझकर विलंब किया जा रहा है तथा बार-बार धन की मांग की जा रही है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार मोहम्मद रहीम के नाम से विद्युत कनेक्शन संख्या 3851960100 मदारपुर, फूलपुर, मड़ियाहूँ रोड, जौनपुर स्थित उनके मकान पर था। वर्ष 2019 में उन्होंने उक्त मकान बेच दिया था। उनका कहना है कि मकान बेचते समय नए स्वामी ने आश्वासन दिया था कि वह अपने नाम से नया विद्युत कनेक्शन लेकर पुराने कनेक्शन को बंद करा देगा। अशिक्षित होने के कारण वह विधिक प्रक्रिया को पूरी तरह समझ नहीं सके। उपभोक्ता के अनुसार वर्ष 2025 में उनके नाम पर लगभग 95 हजार रुपये का विद्युत बिल जारी होने के बाद उन्हें मामले की गंभीरता का पता चला। उनका कहना है कि उन्होंने पहले भी स्थानीय लाइनमैन एवं संबंधित अवर अभियंता को पुराने कनेक्शन को स्थायी रूप से विच्छेदित करने तथा नए स्वामी के नाम से वैध कनेक्शन कराने के लिए सूचना दी थी, लेकिन विभाग की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की गई।
पीड़ित का आरोप है कि बाद में 'समाधान दिवस' के माध्यम से आवश्यक भुगतान कर उन्होंने स्थायी विद्युत विच्छेदन (पीडी) की प्रक्रिया पूरी कराई, लेकिन आवेदन के लगभग छह माह बाद भी उन्हें अंतिम पीडी प्रमाणपत्र नहीं दिया गया। उनका कहना है कि जब भी वह प्रमाण—पत्र की मांग करते हैं, तब संबंधित कर्मचारियों द्वारा मीटर उतारने, लाइन काटने अथवा अन्य कार्यों के नाम पर धन की मांग की जाती है। उपभोक्ता ने यह भी आरोप लगाया कि मकान में रहने वाला व्यक्ति पुराने कनेक्शन का उपयोग करता रहा तथा विद्युत चोरी की शिकायत करने के बावजूद विभाग ने कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की। मामले की शिकायत अधिशासी अभियंता, विद्युत वितरण खण्ड-4 से भी की गई, लेकिन आरोप है कि अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। पीड़ित का कहना है कि यह केवल एक व्यक्ति का मामला नहीं है, बल्कि ऐसे अनेक उपभोक्ता हैं जो स्थायी विद्युत विच्छेदन का शुल्क जमा करने के बाद भी अंतिम विच्छेदन प्रमाणपत्र प्राप्त करने के लिए महीनों तक विभाग के चक्कर लगाने को मजबूर हैं। उन्होंने विभाग के उच्च अधिकारियों से मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई करने तथा पीड़ित उपभोक्ताओं को समयबद्ध तरीके से पीडी प्रमाणपत्र उपलब्ध कराने की मांग की है।
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