Jaunpur News: सरकारी सेवा या निजी सौदेबाजी? पीएचसी सोंधी के आशाओं पर उठे सवाल

Aap Ki Ummid
follow us
Jaunpur News: सरकारी सेवा या निजी सौदेबाजी? पीएचसी सोंधी के आशाओं पर उठे सवाल


राकेश शर्मा

खेतासराय, जौनपुर। स्थानीय प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र सोंधी के आशाओं पर गरीबों के भरोसे से खिलवाड़ का आरोप का मामला सामने आया है। चर्चा है कि जो हाथ गाँवों को सरकारी इलाज का भरोसा दिलाने के लिए उठे थे, वही हाथ अब निजी अस्पतालों की दलाली में रंगे दिख रहे हैं? गरीब माँ की कोख तक अब सौदे की मेज़ बन गई है। जहाँ इंसानियत नहीं, बल्कि कमीशन का हिसाब लिखा जा रहा है।

खामोश गांवों में गूंजता एक बड़ा सवाल

प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) से जुड़ी आशा बहुओं और आशा संगिनियों की कार्यशैली इन दिनों आरोपों के घेरे में है। जिन आशा कर्मियों को सरकार ने गाँव-गाँव तक स्वास्थ्य सेवाओं की रोशनी पहुँचाने की जिम्मेदारी दी थी। उन्हीं पर अब निजी अस्पतालों से सांठ-गांठ कर गरीब मरीजों को वहाँ भर्ती कराने के गम्भीर इल्ज़ाम लग रहे हैं। लोगों का कहना है कि सरकारी अस्पतालों में बेहतर इलाज उपलब्ध होने के बावजूद कई आशा बहुएं मरीजों को निजी अस्पतालों की ओर मोड़ देती हैं। आरोप यह भी है कि सामान्य प्रसव की स्थिति में भी महिलाओं को ऑपरेशन के लिए डराया और दबाव बनाया जाता है, ताकि निजी अस्पतालों को आर्थिक फायदा पहुँच सके।


कथित गोपनीय बैठक ने बढ़ायी इलाके में हलचल

नगर स्थित एक निजी अस्पताल में आशा संगिनियों की अगुवाई में हुई कथित गोपनीय बैठक ने पूरे इलाके में नई बहस छेड़ दी। सूत्रों के मुताबिक इस बैठक में आशा बहुओं को निजी अस्पतालों में अधिक से अधिक मरीज भेजने के लिए प्रेरित किया गया। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि बैठक को पूरी तरह राज़दाराना अंदाज़ में आयोजित किए जाने की चर्चा रही। बताया जाता है कि आशाओं को ड्रेस कोड में न आने और मोबाइल फोन का इस्तेमाल न करने की हिदायत दी गई थी। इससे लोगों के बीच शक और गहरा हो गया है।


नकदी, तोहफे एवं कमीशन का खेल?

सूत्रों के अनुसार बैठक में शामिल लोगों के लिए विशेष दावत की व्यवस्था की गई थी। इतना ही नहीं, प्रतिभागियों को नकदी और उपहार भी बांटे जाने की चर्चा है। इस पूरे घटनाक्रम के बाद लोगों में नाराज़गी और बेचैनी साफ देखी जा रही है। इलाके के लोगों का आरोप है कि गाँवों से मरीजों को सरकारी इलाज का भरोसा देकर निजी अस्पतालों में भर्ती कराया जाता है जहाँ उनसे मनमानी रकम वसूली जाती है। बदले में संबंधित आशा कर्मियों को कमीशन मिलने की बात भी सामने आ रही है। लोगों का कहना है कि कई निजी अस्पताल मरीजों के भरोसे नहीं, बल्कि आशा नेटवर्क के सहारे फल-फूल रहे हैं।

स्वास्थ्य विभाग की चुप्पी पर भी सवाल

पीएचसी सोंधी क्षेत्र में करीब 260 आशा बहुएं और 12 आशा संगिनियां कार्यरत हैं। ये महिलाएं गर्भवती माताओं की देखभाल, टीकाकरण, परिवार नियोजन और सरकारी योजनाओं को गाँवों तक पहुँचाने में अहम भूमिका निभाती हैं लेकिन अब उन्हीं की निष्पक्षता पर सवाल उठ रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि इतने गम्भीर आरोपों के बावजूद स्वास्थ्य विभाग की ओर से अब तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। विभाग की यह खामोशी लोगों के मन में और अधिक संदेह पैदा कर रही है। लोग अब पूरे मामले की निष्पक्ष जाँच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की माँग कर रहे हैं।




ads

ads

ads

ads


ads

ads

ads
ads
 
ads

#buttons=(Ok, Go it!) #days=(20)

Our website uses cookies to enhance your experience. Check Now
Ok, Go it!