हिन्दी पत्रकारिता के 200 वर्ष एवं नई पीढ़ी की भूमिका पर दो राष्ट्रीय वेबिनार सम्पन्न
विरेन्द्र यादव
सरायख्वाजा, जौनपुर। पूर्वांचल विश्वविद्यालय के जनसंचार एवं पत्रकारिता विभाग, कम्युनिकेशन टूडे (त्रैमासिक मीडिया जर्नल जयपुर) तथा भारती विद्यापीठ इंस्टीट्यूट ऑफ कंप्यूटर एप्लीकेशंस एंड मैनेजमेंट नई दिल्ली के संयुक्त तत्वावधान में शनिवार को हिन्दी पत्रकारिता विषयक दो राष्ट्रीय वेबिनार हुआ। वेबिनारों में देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों, मीडिया संस्थानों एवं शोध संस्थाओं से जुड़े शिक्षकों, शोधार्थियों, विद्यार्थियों और मीडिया पेशेवरों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता किया।
प्रथम राष्ट्रीय वेबिनार “हिन्दी पत्रकारिता के 200 वर्ष: परंपरा, परिवर्तन और भविष्य” विषय पर आयोजित हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुलपति पूर्वांचल विश्वविद्यालय जौनपुर प्रो. वंदना सिंह ने कहा कि हिन्दी पत्रकारिता की यात्रा उदन्त मार्तण्ड से प्रारंभ होकर आज रेडियो, टेलीविजन और वेब मीडिया के विभिन्न मंचों से गुजरते हुए वैश्विक स्तर पर अपनी सशक्त एवं विशिष्ट पहचान स्थापित कर चुकी है। हिन्दी पत्रकारिता केवल समाचारों के प्रसार का माध्यम नहीं, बल्कि आमजन की आवाज, लोकतांत्रिक मूल्यों की संरक्षक तथा सामाजिक चेतना की संवाहक रही है। हिन्दी पत्रकारिता जितनी अधिक सशक्त, विश्वसनीय और समृद्ध होगी, देश का लोकतंत्र भी उतना ही अधिक मजबूत और जनोन्मुखी बनेगा।
मुख्य अतिथि वरिष्ठ पत्रकार मुम्बई श्रीनारायण तिवारी ने कहा कि हिन्दी पत्रकारिता के 200 वर्षों के इतिहास में अनेक परिवर्तन हुए हैं और उसने अनेक चुनौतियों का सफलतापूर्वक सामना किया है। वर्तमान समय कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) का युग है लेकिन यह कभी भी मानवीय बौद्धिक क्षमता का विकल्प नहीं बन सकती। प्रिंट मीडिया में प्रकाशित समाचारों की विश्वसनीयता आज भी डिजिटल माध्यमों की तुलना में अधिक है।
मुख्य वक्ता संपादक संचार माध्यम एवं भारतीय जनसंचार संस्थान नई दिल्ली के प्रो. प्रमोद कुमार ने कहा कि पत्रकारिता को समाज के रचनात्मक और सकारात्मक पक्ष को पाठकों के सामने लाना होगा। आज का पाठक समाचारों में सकारात्मक दृष्टिकोण और रचनात्मक सामग्री को अधिक महत्व देता है। भारती विद्यापीठ के निदेशक प्रो. एम.एन. होडा ने एआई की बढ़ती चुनौतियों पर ध्यान आकृष्ट कराया।
इसके बाद आयोजित दूसरे राष्ट्रीय वेबिनार “नई पीढ़ी की नज़र से हिन्दी पत्रकारिता” में पूर्व डीन एकेडमिक अफेयर्स एम.डी. यूनिवर्सिटी रोहतक के प्रो. हरीश कुमार तथा अध्यक्ष पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय अमरकंटक (मध्य प्रदेश) के प्रो. राघवेंद्र मिश्र ने विचार व्यक्त किये। वक्ताओं ने हिन्दी पत्रकारिता की समृद्ध परंपरा, वर्तमान चुनौतियों, डिजिटल मीडिया के बढ़ते प्रभाव तथा भविष्य की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा किया। वेबिनार में शोधपत्रों की प्रस्तुति भी हुई। आयोजन सचिव एवं अध्यक्ष, जनसंचार एवं पत्रकारिता विभाग पूर्वांचल विश्वविद्यालय प्रो. मनोज मिश्र ने सभी अतिथियों, वक्ताओं एवं प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम का संचालन संपादक कम्युनिकेशन टूडे प्रो. संजीव भनावत, संयोजन प्रियंका सिंह तथा धन्यवाद ज्ञापन डॉ. दिग्विजय सिंह राठौर ने किया। वेबिनार में जयंत राठी, पुष्पेंद्र सचान, डॉ. पृथ्वी सेंगर, आयोजन समिति के अन्य सदस्यों का विशेष योगदान रहा। इस अवसर पर प्रो. बाला लखेंद्र, डॉ. चंदन सिंह, डॉ. अवध बिहारी सिंह समेत देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों एवं संस्थानों से जुड़े अनेक शिक्षक, शोधार्थी, विद्यार्थी और मीडिया पेशेवर ऑनलाइन माध्यम से वेबिनार में जुड़े रहे।
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