श्रीमद् भागवत कथा श्रवण से सुख शान्ति के साथ मिलती है मुक्ति
पंकज बिन्द
महराजगंज, जौनपुर। स्थानीय क्षेत्र के बहाउद्दीनपुर में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के पूर्व महामंडलेश्वर श्री श्री 1008 डॉ भारती यामिन के नेतृत्व में कलश यात्रा निकाली गई जो पूरे गांव के भ्रमण के साथ पुनः कथास्थल पर आकर समाप्त हुई। इस दौरान 108 महिलाएं सिर पर कलश रखकर चल रही थीं।
इस संदर्भ में महामंडलेश्वर डॉ भारतीय यामिनी ने कहा कि मंगल यात्रा के साथ 33 कोटि देवताओं को कथा श्रवण हेतु आमंत्रित किया जाता है। भागवद कथा के श्रवण से इस संसार सागर से मुक्ति व परमात्मा मिलन संभव हो पाता है। भागवत कथा से मानव के मानवीय गुणों का विकास होता है। सत्कर्म की प्रेरणा मिलती है। सत्संग से मानव महामानव व देवत्व प्राप्त करने में सक्षम हो पाता है। कथा श्रवण से प्राप्त ज्ञान के प्रकाश से व्यक्ति को स्वयं की पहचान होती है। ऐसे में परमात्मा से साक्षात्कार की संभावना बढ़ जाती है।
उन्होंने बताया कि राजा परीक्षित से कलयुग ने अपने रहने का स्थान मांगा तो उन्होंने हिंसालय, मदिरालय, वेश्यालय, जुआलय व अनीति से कमाए गए सोने में रहने का स्थान दिया था। जरासंध के चमकदार सोने के मुकुट अनीति से अर्जित किया गया था। उसी मुकुट को जब राजा परीक्षित ने अपने सिर पर धारण कर लिया तो उनके अंदर कलयुग ने प्रवेश करके उनके द्वारा संतों का अपमान कराया। आज भी इन पांचो जगहों पर कलयुग का वास होता है। ऐसे में हमें इन पांचो चीजों से हमेशा बचाना चाहिए। इस अवसर पर आयोजक अरुण गुप्ता, मंगरू साहू, नन्द लाल गुप्ता, तीर्थराज सहित सैकड़ों लोग मौजूद रहे।
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