'भारत में लोकतांत्रिक समावेशिता के 75 वर्ष' विषयक दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार का हुआ शुभारम्भ
डा. संजय यादव
सिंगरामऊ, जौनपुर। उत्तर प्रदेश उच्च शिक्षा निदेशालय द्वारा प्रायोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार का भव्य शुभारंभ बुधवार को राजा हरपाल सिंह महाविद्यालय में हुआ। राजनीति विज्ञान विभाग द्वारा आयोजित सेमिनार का विषय ‘भारत में लोकतांत्रिक समावेशिता के 75 वर्ष’ रहा।
उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. वंदना सिंह ने कहा कि लोकतांत्रिक समावेशिता के लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए समाज को अपने मूल्यों और सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ना आवश्यक है। राष्ट्र का सर्वांगीण विकास तभी संभव है जब नई पीढ़ी नैतिक मूल्यों और आध्यात्मिक वातावरण को आत्मसात करे।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. अरुण सिंह ने किया। सेमिनार के मुख्य वक्ता आर्य कन्या पीजी महाविद्यालय वाराणसी के प्रो. विश्वनाथ प्रसाद मिश्र ने अर्थशास्त्री एडम स्मिथ की प्रसिद्ध पुस्तक ‘वेल्थ ऑफ नेशन्स’ का संदर्भ देते हुए वर्तमान वैश्विक आर्थिक असमानता पर चिंता व्यक्त की। विश्व की लगभग 90 प्रतिशत संपत्ति केवल एक प्रतिशत लोगों के पास केंद्रित है जो समावेशी लोकतंत्र के लिए चुनौती है।
विशिष्ट अतिथि लखनऊ विश्वविद्यालय के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. आर.के. मिश्र ने कहा कि लोकतांत्रिक समावेशिता तभी सार्थक होगी जब स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार के अवसर समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचेंगे। आयोजन सचिव प्रो. जय मिश्र ने विषय प्रवर्तन करते हुए कहा कि समावेशिता ही लोकतंत्र की वास्तविक पहचान है। कार्यक्रम का संचालन सहायक आचार्य डॉ. राजेश सिंह ने किया।
कार्यक्रम में प्रो. इंदु प्रकाश, डॉ. योगेश कुमार, डॉ. जे.पी. सिंह, डॉ. बृजेश प्रताप सिंह, डॉ. मनोज सिंह, डॉ. गिरीशमणि त्रिपाठी, डॉ. राजीव त्रिपाठी सहित अनेक प्राध्यापकों ने अतिथियों का अभिनंदन किया। इस अवसर पर प्रो. चंद्रलेखा, प्राचार्यगण प्रो. सुरेश पाठक, प्रो. सुधाकर सिंह, प्रो. शम्भू राम, प्रो. अखिलेश्वर शुक्ला, प्रो. पंकज सिंह, डॉ. दिग्विजय सिंह राठौर, डॉ. संजय सिंह, डॉ. अजय दुबे सहित बड़ी संख्या में शोधार्थी एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
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