दिव्यांगम चैनल के संस्थापक विष्णुकांत का हुआ सम्मान
विशाल रस्तोगी/गोविन्द वर्मा
सीतापुर/बाराबंकी। जनपद के शिवराम सिंह इंटर कालेज में आयोजित दिव्योत्सव अखिल भारतीय कवि सम्मेलन में जनपद के लब्धप्रतिष्ठ कवि, राष्ट्रीय कवि संगम के राष्ट्रीय मंत्री साहित्य भूषण कमलेश मौर्य मृदु को मुख्य अतिथि के नाते सम्मानित किया गया। दिव्यांगम चैनल के संस्थापक एवं विकलांग साथी ट्रस्ट के राष्ट्रीय अध्यक्ष कविवर विष्णुकांत मिश्रा को विशेष सम्मान प्रदान किया गया। इस ऐतिहासिक कवि सम्मेलन में खुर्जा, बुलन्दशहर, गाजियाबाद, झांसी, उन्नाव, बलरामपुर, बहराइच, सीतापुर, लखनऊ, बाराबंकी, आजमगढ़, दिल्ली, बिहार से पधारे 48 कवि एवं कवयित्रियों ने काव्य पाठ किया।
मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय कवि गजेंद्र सिंह प्रियांशु, रामकिशोर तिवारी, डा अंबरीष अंबर की उपस्थिति उल्लेखनीय रही। कवि सम्मेलन का संचालन संजय शर्मा व किरन भारद्वाज ने संयुक्त रूप से किया। सह संयोजक सुधा सिंह व संरक्षक मगन बिहारी ने अतिथियों का स्वागत किया। काव्य पाठ करने वाले कवियों में विजय तन्हा, डा रेनू सिंह, संजीव मिश्र, अयोध्या प्रसाद सुमन, हिना कैशर, प्रगति बाजपेई, डा अशोक गुलशन, अमित श्रीवास्तव, साहब सरन वर्मा आदि प्रमुख रहे। कमलेश मौर्य मृदु की आशु कविताएं सुनकर सभी मंत्र—मुग्ध हो गये, उनके मुक्तक व गीत की खूब सराहना हुई—— अब तो कथनी और करनी में न किंचित सन्तुलन है। भाषणों में अमृत झरता विष भरा अंत:करण है। हो गये हैं आचरण शो-पीस से कृत्रिम हमारे। हो जरुरत तो सजा लो फिर पैक कर रख दो किनारे।।
रामकिशोर तिवारी के हिंदी पर सवैया छंद और गजेन्द्र प्रियांशु का गीत "राजा के दिन रानी के दिन" सुनकर सभी झूम उठे। डा रेनू सिंह की महाराणा प्रताप को समर्पित रचना खूब सराही गई। संजय शर्मा का लोक गीत "मैया पुतवा बोलाई तब आवै का परी" सबको बहुत भाया। अयोध्या प्रसाद सुमन का लोक गीत "इनका मारेउ ना बिटिया नयन की पुतरी" सुनकर लोगों की आंखें गीली हो गईं। सभी कवियों को अंगवस्त्र स्मृति चिन्ह भेंट करके सम्मानित किया गया। कवि सम्मेलन का समापन राष्ट्रगान जन-गण-मन से हुआ।
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