डा. संजय यादव
बदलापुर, जौनपुर। बेटियों के प्रति बदली सोच की एक प्रेरणादायक कहानी सामने आई है। बेटी के जन्म पर परिवार ने गाजे‑बाजे, डीजे और आतिशबाजी के साथ ग्रैंड वेलकम किया।
एक साधारण परिवार ने अपनी नवजात बेटी को अस्पताल से घर लाते समय बेहद अनोखे और दिल छू लेने वाले तरीके से जश्न मनाया। नवजात कन्या को ले जानी वाली गाड़ी को अनोखे अंदाज में गुलाबी गुब्बारों, फूल पत्तियों से सजा कर अस्पताल से आतिशबाजी और गाजे—बाजे के बीच घर वार्ड नंबर 7 पुरानी बाजार लाया गया। नवजात शिशु की आगवानी में मुख्य प्रवेश द्वार तोरण तथा रंग बिरंगे फूलों तथा गुम्बारो से सजाया गया था। इसका मुख्य उद्देश्य बेटियों के प्रति बदलती सोच को दर्शाना है। प्रवेश द्वार के बाद घर के अंदर भी रंगीन गुब्बारे रोशनी और भव्य डेकोरेशन किया गया था। सकारात्मक माहौल के लिए घर के अन्दर हल्के रंग के पर्दों से सुसज्जित बेड पर नवजात शिशु के लिए नरम खिलौने रंग बिरंगे गुब्बारे रखे गये थे। परिजनों के बीच खुशनुमा माहौल था। इस अवसर पर अतुल शर्मा, अंजू, अनुराधा, नीतू, विद्या देवी, सरिता, माधुरी आदि लोग मौजूद थे।
यह पहला समाज में "बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ" का संदेश देती है और यह स्थापित करती है कि बेटियां परिवार की बोझ नहीं बल्कि लक्ष्मी का रूप है—— अतुल शर्मा।
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