संतन के संग लाग रे तेरी अच्छी बनेगी भजन सुनकर श्रोता भाव—विभोर
डा. प्रदीप दूबे
सुइथाकला, जौनपुर। स्थानीय विकास खण्ड स्थित सुइथाकला गांव में यमुना प्रसाद सिंह के आवास पर चल रही सप्त दिवसीय संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा के चतुर्थ दिवस पर सरस कथा व्यास आचार्य शान्तनु जी महाराज ने कथा प्रेमियों को भक्त ध्रुव और राजा पृथु की सरस कथा सुनाई।
कथा क्रम में आचार्य ने कहा कि जहां धर्म हो वही विजय होती है, महाभारत युद्ध में दुर्योधन भगवान श्रीकृष्ण से 18 अक्षोहिणी सेना मांग लेता है लेकिन अर्जुन ने सेना त्यागकर कहा कि हे प्रभू मैं युद्ध हारने को तैयार हूं लेकिन आपको छोड़ने के तैयार नहीं हूं, धर्म के मार्ग का यह संदेश आज भी सर्वविदित है, यत्र योगेश्वरः कृष्णो यत्र पार्थो धनुर्धरः। तत्र श्रीर्विजयो भूतिर्ध्रुवा नीतिर्मतिर्मम। जहाँ योगेश्वर भगवान् श्रीकृष्ण हैं और जहाँ गाण्डीवधनुषधारी अर्जुन हैं, वहाँ ही श्री, विजय, विभूति और अचल नीति है। आचार्य ने भारत की महिमा का गुणगान करते हुए कहा कहा कि भारत देश सम्पूर्ण व्रह्माण्ड की आत्मा है, इसीलिए भगवान यहां बार बार अवतार लिये है। जैसे आत्मा के बिना शरीर का कोई अस्तित्व नहीं रहता, उसी प्रकार भारत देश के बिना सम्पूर्ण विश्व निष्प्राण है। हमारे यहां का समरस समाज विश्व कल्याण का मार्ग प्रशस्त करता है।
उन्होंने कहा कि समरस समाज से ही विश्व का कल्याण सम्भव है। गायन्ति देवा किल गीतकानि, धन्यास्तु ते भारत भूमि भागे। देवता भी भारत की महिमा का गुणगान करते है। जहां सत्य अहिंसा और न्याय का पग-पग लगता फेरा देश भक्ति गीत सुनकर श्रोता में राष्ट्र भक्ति पुष्पित हो उठी, वहीं संतन के संग लाग रे तेरी अच्छी बनेगी भजन सुनकर श्रोता भगवद भक्ति में भाव-विभोर हो गये। भागवत कथा पूजन के क्रम में मुख्य यजमान यमुना प्रसाद सिंह ने सपत्नीक परिवार के साथ पूजन एवं आरती किया। श्रीमद्भागवत कथा संयोजक के रूप में रमेश सिंह, डाॅ. उमेश सिंह, डाॅ. दिनेश सिंह आदि सम्मिलित रहे। इस अवसर पर भारी संख्या में भागवत कथा प्रेमीजन उपस्थित रहे।
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