विधि—विधान एवं हर्षोल्लासपूर्वक रखा गया 36 घण्टे का निराहार निर्जल व्रत
अनिल कश्यप
हापुड़। चैत्र शुक्ल पक्ष में 22 मार्च दिन रविवार से प्रारम्भ कर 25 मार्च दिन बुधवार तक पूरी श्रद्धा पूरी निष्ठा के साथ छठ महापर्व किया। 22 मार्च दिन रविवार नहाय-खाय इस दिन महापर्व कर पूरे दिन में एक बार अरवा चावल, लौकी का सब्जी, चना का दाल प्रसाद में ग्रहण किया। 23 मार्च दिन सोमवार को पूरे दिन निराहार व्रत रखा और सायं के समय अरवा चावल, गाय का दूध, गुड़ का खीर प्रसाद और रोटी का प्रसाद बनाकर भोग लगाकर सायं के समय ग्रहण किया और परिवार में तथा अपने इष्ट मित्रों में भी वितरण किया। 24 मार्च दिन मंगलवार को पूरे दिन निर्जला व्रत रखा और सायं के समय डूबते सूर्य को लगभग सायं 06 बजकर 40 मिनट बजे प्रथम अर्घ्य जल में खड़े होकर जल दिया गया। 25 मार्च दिन बुधवार प्रातःकाल स्न्नान कर उगते हुए सूर्यदेव को लगभग 5 बजकर 45 मिनट बजे जल में खड़े होकर अर्घ्य प्रदान किया। तदोपरांत हवन कर प्रसाद वितरण किया गया। चैत्र मास में मनाई जाने वाली (महापर्व) छठ पूजा को चैती छठ कहा जाता है जो कार्तिक छठ की तरह ही 4 दिनों का पर्व है। यह चैत्र शुक्ल चतुर्थी से सप्तमी तक होता है और सूर्यदेव व छठी मैया की पूजा पर केंद्रित रहता है। इस आशय की जानकारी श्री सनातन ज्योतिष कर्मकांड महासभा के प्रदेश अध्यक्ष ने दी है।
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