Jaunpur News: संसाधन व्यक्ति का प्रभावी उपयोग के बारे में सेमिनार आयोजित

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Jaunpur News: संसाधन व्यक्ति का प्रभावी उपयोग के बारे में सेमिनार आयोजित


जौनपुर। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के तत्वावधान में जनप‌द न्यायाधीश अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण सुशील शशि के नेतृत्व और निर्देशन एवं सचिव सिविल/सीनियर डिवीजन सुशील सिंह की अध्यक्षता में संसाधन व्यक्ति का प्रभावी उपयोग विषय पर सेमिनार एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम जनपद न्यायालय के ‌सभाकक्ष में हुआ। उक्त कार्यक्रम में सुशील सिंह सचिव/सिविल सीनियर डिवीजन, डा. दिलीप सिंह डिप्टी चीफ डिफेंस काउंसिल, जिला प्रोफेशन अधिकारी विजय पांडेय, पुलिस क्षेत्राधिकारी देवेंद्र सिंह, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी डा. गोरखनाथ पटेल, सह परिवीक्षा अधिकारी मुरलीधर गिरी, चीफ डिफेंस काउंसिल अनिल सिंह, असिस्टेंट डिफेंस काउंसिल प्रकाश तिवारी, अनुराग चौधरी, बाल कल्याण समिति के सदस्यगण विनय सिंह, उमाशंकर सिंह, माधुरी गुप्ता, प्राधिकरण के सुनील मौर्य, राकेश यादव, राजेश यादव, अरविंद चौबे, बृजेश कुमार, सुनील कनौजिया, सुनील गौतम, रिसोर्स पर्सन विनय तिवारी, उर्वशी सिंह, मनोज सिंह, चांदनी, प्रियांशु सिंह, पीएलबी सुभाष यादव, शिवशंकर सिंह सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।

सचिव सुशील सिंह ने बताया कि पाक्सो अधिनियम एक बहुत ही संवेदनशील और महत्वपूर्ण अधिनियम है जिसमें पीड़ित ‌किशोर भाई के लड़कियों और लड़कों को हर प्रकार की विधि चिकित्सकीय भावनात्मक मनोवैज्ञानिक एवं अन्य सहायता देने के लिए ‌एनजीओ और समाजसेवा के क्षेत्र में विधि के जानकार लोगों की 13 सदस्यों की एक टीम बनाई गई है जो इन पीड़ित प्रताड़ित लोगों की प्रभावी पैरवी और सहायता के लिए काम कर रहे हैं।

इसी क्रम में उपस्थित अन्यवक्ताओं ने कार्यक्रम को प्रभावी ढंग से लागू करने में अपने बहुमूल्य विचार व्यक्त किया और सभी तंत्रों को समन्वित रूप से इसमें योगदान देने की बात कही।

कार्यक्रम का सफल और उत्तम संचालन करते हुए डिप्टी चीफ डिफेंस काउंसिल डा. दिलीप सिंह ने बताया कि रिसोर्स पर्सन की नियुक्ति होने से अब पैक्सो अधिनियम के पीड़ित प्रताड़ित लोगों को बहुत सहायता मिल रही है। इस अधिनियम को ऐसे भी बहुत कठोर बनाया गया है जिसमें 3 वर्ष से लेकर आजीवन कारावास और 12 वर्ष से कम आयोग के बच्चों का शोषण करने पर फांसी की सजा का भी प्रावधान है। इस तरह के प्रशिक्षण के कार्यक्रम बार-बार होने अति आवश्यक है। इससे पहले तौर पर आधारित बच्चे निडर होकर अपनी बात न्यायालय के सामने कह सकेंगे।



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