अजय पाण्डेय/राकेश शर्मा
जौनपुर। विकास खंड सिरकोनी के बाकराबाद गांव में ग्राम प्रधान और सचिव पर गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आये हैं। ग्रामीणों का कहना है कि शिकायत के बाद जांच टीम गठित तो की गई लेकिन अब तक कार्रवाई केवल कागजों तक सीमित नजर आ रही है। इससे गांव के लोगों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है।
ग्रामीणों के अनुसार ग्राम प्रधान पोल्हन मौर्य और सचिव आरती मौर्य की कथित मिलीभगत से सरकारी योजनाओं में बड़े स्तर पर फर्जीवाड़ा किया जा रहा है। आरोप है कि विकास कार्यों को कागजों पर पूरा दिखाकर सरकारी धन का दुरुपयोग किया गया जबकि जमीनी स्तर पर स्थिति बदहाल बनी हुई है। मामले को लेकर गांव के लोगों ने जिला अधिकारी को प्रार्थना पत्र सौंपकर निष्पक्ष जांच की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते सख्त कार्रवाई नहीं की गई तो वे आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।
गांव में मूलभूत सुविधाओं की स्थिति को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क, नाली, आवास और अन्य सरकारी योजनाओं में अनियमितताएं बरती गई हैं। कई योजनाएं कागजों में पूरी दिखा दी गईं लेकिन धरातल पर उनका कोई अस्तित्व नहीं है।
प्रदेश सरकार द्वारा भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त रुख अपनाने और शिकायतों के त्वरित निस्तारण के निर्देशों के बावजूद स्थानीय स्तर पर लापरवाही सामने आ रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि जन शिकायतों के निस्तारण में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी लेकिन बाकराबाद के मामले में इसका असर दिखाई नहीं दे रहा।
ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि मामले की जानकारी होने के बावजूद खंड विकास अधिकारी (बीडीओ) द्वारा कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। इससे प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि जिला प्रशासन इस मामले में कब तक निष्पक्ष जांच पूरी कर दोषियों पर कार्रवाई करेगा। गांव के लोग न्याय की उम्मीद लगाए बैठे हैं लेकिन जांच की धीमी रफ्तार से उनकी उम्मीदें कमजोर पड़ती नजर आ रही हैं।
ग्रामीणों ने मांग निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो, सरकारी धन के दुरुपयोग की भरपाई कराई जाए योजनाओं का लाभ वास्तविक पात्रों तक पहुंचे। अब देखना यह है कि प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से लेता है और बाकराबाद के ग्रामीणों को कब तक न्याय मिल पाता है?
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