जरूरतमन्दों की सेवा में जुटी संस्था, समाज को दिया सहयोग का संदेश: सीएच तिवारी
आरएल पाण्डेय/शुभम जायसवाल
लखनऊ। प्रेरणाश्रोत बाबा नीम करौली जी की कृपा से इण्डियन हेल्पलाइन सोसाइटी द्वारा संचालित बृज की रसोई सेवा प्रकल्प के अंतर्गत रविवार को आशियाना के आशियाना क्षेत्र में आयोजित निःशुल्क भोजन वितरण सेवा कार्यक्रम संपन्न हुआ।
इस मौके पर संजय श्रीवास्तव ने कहा कि कार्यक्रम का उद्देश्य समाज के अकिंचन, असहाय, निराश्रित, श्रमजीवी एवं जरूरतमंद वर्ग को सम्मानपूर्वक पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराना है। बड़ी संख्या में जरूरतमंदों ने पौष्टिक निःशुल्क भोजन ग्रहण किया तथा स्वयंसेवकों द्वारा सेवा भाव से भोजन वितरण किया गया।
विकास पाण्डेय ने बताया कि यह सेवा केवल भोजन वितरण तक सीमित नहीं है, बल्कि मानवता, सहयोग और संवेदना का जीवंत उदाहरण है। कार्यक्रम में समाज के विभिन्न वर्गों के लोगों ने बढ़-चढ़कर सहभागिता निभा कर सहयोग प्रदान किया। संस्थापक विपिन शर्मा ने सभी सहयोगकर्ताओं के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सेवा ही सच्ची साधना है और इसी पावन भावना के साथ संस्था निरंतर जरूरतमंदों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने हेतु कार्यरत है।
उन्होंने अपील किया कि जीवन के खास पल जन्मदिन, वैवाहिक वर्षगांठ, पुण्यतिथि अथवा किसी भी खुशी के अवसर को और अधिक सार्थक बनाइये। हमारे इस पुण्य सेवा कार्य से जुड़कर उन चेहरों पर खुशियाँ बाँटिए, जिनके जीवन में मुस्कुराने के अवसर सीमित होते हैं। आपका छोटा सा सहयोग किसी बच्चे की मुस्कान, किसी माँ की तसल्ली और किसी बुजुर्ग की दुआ बन सकता है। आइए, आगे बढ़कर हाथ थामिए क्योंकि किसी के हिस्से की रोटी बनना ही सबसे बड़ी इंसानियत है।
राजीव पाण्डेय ने कहा कि इस दौरान अनुशासन, स्वच्छता एवं सुव्यवस्थित प्रबंधन विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। उपस्थित लोगों ने संस्था के इस प्रयास की सराहना करते हुए इसे समाज के लिए प्रेरणादायक पहल बताया। कार्यक्रम में सी.एच. तिवारी, राजीव पाण्डेय, बलवंत सिंह, संजय श्रीवास्तव, अनुराग दुबे, अर्पित रावत, विकास पाण्डेय, अखिलेश सिंह, राम आसरे कनौजिया, गोविन्द सिंह सहित अनेक सहभागियों की सक्रिय सहभागिता रही।
वहीं अनुराग दुबे ने अपील किया कि अधिक से अधिक लोग इस प्रकार के परोपकारी कार्यों से जुड़कर समाज के वंचित वर्ग की सेवा में सहभागी बनें जिससे हर भूखे चेहरे पर मुस्कान लाई जा सके। इस अवसर पर तमाम लोग उपस्थित रहे।
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