चन्दन अग्रहरि
शाहगंज, जौनपुर। स्थानीय नगर के रामलीला मैदान में चल रही नौ दिवसीय श्रीराम कथा के छठे दिन भगवान श्रीराम के राज्याभिषेक से लेकर वनवास तक का अत्यंत भावुक प्रसंग सुनाया गया। कथा व्यास राजन जी महाराज ने जब अयोध्या में राज्याभिषेक की तैयारियों, कैकेयी के कोपभवन और राम के वनगमन का वर्णन किया तो पंडाल में मौजूद श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे।
कथावाचक ने बताया कि अयोध्या में चारों ओर उत्सव का माहौल था। महाराज दशरथ ने गुरुजनों से परामर्श कर भगवान श्रीराम के राज्याभिषेक की तैयारी शुरू कर दी थी। नगरवासी अपने प्रिय राम को राजा के रूप में देखने को उत्सुक थे। इसी बीच कथा में वह मोड़ आया जब कैकेयी ने कोपभवन जाकर पूर्व में मिले दो वरदानों की याद दिलाई। उन्होंने भरत के लिए राजगद्दी और राम के लिए चौदह वर्ष का वनवास मांग लिया।
यह सुनकर राजा दशरथ शोक में डूब गए। कथावाचक ने बताया कि पुत्र वियोग का आघात वे सह नहीं सके और अंततः उनका निधन हो गया। उधर श्रीराम ने पिता की आज्ञा को सर्वोपरि मानते हुए बिना किसी विरोध के वन जाने का निर्णय लिया। माता, सीता और भ्राता लक्ष्मण भी उनके साथ चल पड़े। राम के वनगमन का दृश्य सुनाते समय पंडाल में सन्नाटा छा गया और कई श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं।
कथा के दौरान सामाजिक संदेश भी दिए गए। कथा वाचक ने कहा कि जीवन में मर्यादा, त्याग और कर्तव्य पालन ही सच्ची पूजा है। उन्होंने जन्मदिन जैसे अवसरों पर केक काटने के बजाय पौधरोपण करने की अपील करते हुये पर्यावरण संरक्षण को समय की आवश्यकता बताया। अंत में सामूहिक आरती हुई और श्रद्धालुओं में प्रसाद वितरित किया गया। “जय श्रीराम” के जयघोष से पूरा परिसर गूंज उठा। नगर सहित आस—पास के गांवों से बड़ी संख्या में लोग कथा श्रवण के लिए पहुंचे।
आयोजन समिति के श्रीश अग्रहरि, आनंद अग्रहरि, विशाल अग्रहरि, भुवनेश्वर मोदनवाल, कृष्णकांत सोनी, राम अवतार अग्रहरि, अश्वनी अग्रहरि, श्रीश मोदनवाल, सुनील अग्रहरि, विवेक सोनी, शीम प्रकाश अग्रहरि, बिट्टू किन्नर ने सभी श्रद्धालुओं के प्रति आभार जताया।
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