Jaunpur News: डॉ. अर्पिता स्नेह की पीएचडी से केला कृषि विकास को मिली नई दिशा

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Jaunpur News: डॉ. अर्पिता स्नेह की पीएचडी से केला कृषि विकास को मिली नई दिशा
  • कम्युनिकेशन इफेक्टिवनेस फॉर एग्रीकल्चर डेवलपमेंट: ए स्टडी बेस्ड ऑन बनाना (केला) ग्रोवर्स ऑफ वैशाली डिस्ट्रिक्ट ऑफ बिहार

जौनपुर। मीडिया शिक्षा और शोध के क्षेत्र में वैशाली की बेटी डॉ. अर्पिता स्नेह ने वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय से जनसंचार में पीएचडी प्राप्त कर ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। उनका शोध विषय— 'कम्युनिकेशन इफेक्टिवनेस फॉर एग्रीकल्चर डेवलपमेंट: ए स्टडी बेस्ड ऑन बनाना (केला) ग्रोवर्स ऑफ वैशाली डिस्ट्रिक्ट ऑफ बिहार' सामाजिक विकास और सरकारी कृषि योजनाओं को मजबूत बनाने में संचार की भूमिका को रेखांकित करता है। यह अध्ययन बिहार सरकार की केला उत्पादक नीतियों, किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) और केकेआर जैसी पहलों के लिए व्यावहारिक सुझाव देता है, जिससे ग्रामीण वैशाली के हजारों केला किसानों को सशक्त बनाने में मदद मिलेगी। फैकल्टी ऑफ एप्लाइड सोशल साइंस एंड ह्यूमैनिटीज़ के डिपार्टमेंट ऑफ मास कम्युनिकेशन से पूर्ण यह शोध अकादमिक जगत में सराहनीय रहा। मार्गदर्शक डॉ. चंदन सिंह के नेतृत्व में तैयार इस कार्य का मूल्यांकन माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल के डॉ. श्रीकांत सिंह ने बाह्य परीक्षक के रूप में किया। डॉ. अर्पिता का यह शोध सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए सरकारी प्रयासों को संचार रणनीतियों से जोड़ने का महत्वपूर्ण दस्तावेज है, जो वैशाली जैसे कृषि-प्रधान जिलों में केला किसानों की आय दोगुनी करने वाली योजनाओं को प्रभावी बनाने में सहायक सिद्ध होगा।

डॉ. अर्पिता स्नेह का शैक्षणिक सफर प्रेरणादायक है। माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय से एमफिल (मीडिया स्टडीज़) और पीजी डिप्लोमा इन वेब कम्युनिकेशन प्राप्त करने वाली वे स्नातकोत्तर में यूनिवर्सिटी टॉपर और 12वीं में कॉलेज टॉपर रहीं। उनके 10 से अधिक शोध पत्र राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय जर्नल्स में प्रकाशित हैं, जबकि 15+ सेमिनारों-सम्मेलनों में सक्रिय भागीदारी रही। राष्ट्रीय हिंदी-अंग्रेजी दैनिकों में नियमित स्तंभकार के रूप में वे सामाजिक, मीडिया और विकास विषयों पर लिखती हैं।

12 जनवरी 2026 को प्राप्त इस पीएचडी का श्रेय डॉ. अर्पिता अपनी माता डॉ. केकी कृष्ण और पिता डॉ. अवध किशोर सिंह को देती हैं। उनकी यह सफलता वैशाली जिले, परिवार और विश्वविद्यालय के लिए गौरव का विषय है, जो युवाओं—खासकर छात्राओं—के लिए प्रेरणा स्रोत बनेगी। समर्पण और परिश्रम से सरकारी योजनाओं को सामाजिक विकास से जोड़ने वाले लक्ष्यों को हासिल किया जा सकता है, यह संदेश देती उनकी उपलब्धि।


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