हिमांशु श्रीवास्तव
जौनपुर। कैरी बैग के लिए सात रुपये अतिरिक्त वसूलना वी-मार्ट को भारी पड़ गया। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, जौनपुर के आदेश पर वी-मार्ट प्रतिष्ठान के मैनेजर ने बुधवार को 3007 की राशि आयोग में जमा की। आयोग के अध्यक्ष विनोद सिंह और सदस्य गीता की पीठ ने अधिवक्ता हिमांशु श्रीवास्तव द्वारा दायर परिवाद पर सुनवाई करते हुए 20 सितंबर 2025 को आदेश दिया था कि उपभोक्ता से वसूले गये 7 वापस किये जायं। मानसिक पीड़ा के लिए 1500 एवं वाद व्यय के रूप में 1500 मिलाकर कुल 3007 की क्षतिपूर्ति निर्णय के एक माह के भीतर अदा की जाय।
क्या था मामला?
नगर के जोगियापुर निवासी दीवानी अधिवक्ता हिमांशु श्रीवास्तव ने 26 नवंबर 2024 को आयोग में परिवाद दायर किया था। उनका आरोप था कि 18 अगस्त 2024 को वी-मार्ट (बदलापुर पड़ाव) से ₹799 की खरीदारी के दौरान उनसे कैरी बैग के नाम पर 7 अतिरिक्त वसूले गये जो सेवा में कमी तथा अनुचित व्यापारिक व्यवहार है।
परिवाद में यह भी कहा गया कि वी-मार्ट के नियमों के अनुसार ग्राहक अपनी ओर से कैरी बैग अंदर नहीं ले जा सकते लेकिन खरीदारी से पहले कहीं भी कैरी बैग के लिए अतिरिक्त शुल्क की सूचना प्रदर्शित नहीं की गई थी। उपभोक्ता को खरीदारी के समय इसकी कोई पूर्व जानकारी नहीं दी गई। परिवादी ने खरीददारी की रसीद सहित प्रमाण पेश किए और राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग के 22 दिसंबर 2020 के एक महत्वपूर्ण फैसले का हवाला भी दिया जिसमें दुकानों को ग्राहकों पर मजबूरी में कैरी बैग का शुल्क थोपने को अनुचित व्यापारिक व्यवहार माना गया था।
इससे पहले भी लगा था हर्जाना
परिवाद में यह भी उल्लेख किया गया कि इससे पूर्व बाजार कोलकाता द्वारा कैरी बैग के 6 वसूलने पर उपभोक्ता फोरम ने 3000 का हर्जाना लगाया था जिसे उन्होंने फोरम में जमा भी किया था।
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