पूविवि में स्टार्टअप फंडिंग एवं सतत विकास पर कार्यशाला आयोजित
शुभांशू जायसवाल
जौनपुर। पूर्वांचल विश्वविद्यालय के वित्तीय अध्ययन विभाग की ओर से शनिवार को आर्यभट्ट सभागार रज्जू भैया संस्थान में ‘विकसित भारत 2047 के लिए उद्यमिता एवं प्रबंधन रणनीति: स्टार्टअप फंडिंग से सतत विकास तक, पूर्वांचल क्षेत्र के विशेष संदर्भ में’ विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला हुआ। कार्यक्रम में प्रमुख वक्ता के रूप में राष्ट्रीय वित्तीय प्रबंधन संस्थान (एनआईएफएम) वित्त मंत्रालय भारत सरकार फरीदाबाद के पूर्व प्राध्यापक एवं प्रख्यात प्रबंधन विशेषज्ञ प्रो. एस.एस. खनका की विशेष सहभागिता रही।
कार्यशाला में उद्यमिता, नवाचार, स्टार्टअप वित्तपोषण एवं सतत आर्थिक विकास के विभिन्न पहलुओं पर विचार-विमर्श किया गया। विकसित भारत 2047 की परिकल्पना को साकार करने में युवाओं की उद्यमशीलता, प्रबंधकीय दक्षता तथा स्थानीय संसाधनों के प्रभावी उपयोग की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया गया।
प्रो. खनका की उद्यमिता एवं प्रबंधन के क्षेत्र में व्यापक विशेषज्ञता के संदर्भ में स्टार्टअप संस्कृति, वित्तीय संसाधनों की उपलब्धता, नवाचार आधारित व्यवसाय तथा रोजगार सृजन जैसे विषय चर्चा के केंद्र में रहे। पूर्वांचल क्षेत्र में कृषि आधारित उद्योगों, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों तथा स्थानीय उत्पादों के माध्यम से आर्थिक विकास की संभावनाओं को भी रेखांकित किया गया।
कार्यशाला में चौधरी बंसी लाल विश्वविद्यालय भिवानी हरियाणा के प्रबंधन विज्ञान संकाय के पूर्व अधिष्ठाता एवं प्राध्यापक प्रो. संजय कुमार सिन्हा ने भी वक्ता के रूप में सहभागिता किया। कार्यक्रम का आयोजन विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राकेश सिंह के संरक्षण में किया गया। कार्यक्रम संयोजक डॉ. सुशील कुमार एवं आयोजन सचिव डॉ. आलोक गुप्ता ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कार्यशाला के विषय की प्रासंगिकता एवं महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने विकसित भारत के निर्माण में उद्यमिता, प्रबंधन शिक्षा, नवाचार और स्वरोजगार की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। साथ ही पूर्वांचल क्षेत्र में उद्यमशीलता को प्रोत्साहित करने तथा युवाओं को नए व्यावसायिक अवसरों से जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया।
कार्यक्रम का संचालन प्रो. अजय द्विवेदी ने किया। कार्यशाला में प्रबंधन संकाय के समस्त शिक्षक एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। विद्यार्थियों को उद्यमिता, स्टार्टअप वित्तपोषण और प्रबंधन के समकालीन आयामों से परिचित होने का अवसर मिला। वित्तीय अध्ययन विभाग द्वारा आयोजित इस कार्यशाला ने विकसित भारत 2047 के राष्ट्रीय संकल्प के अनुरूप उद्यमिता, प्रबंधन शिक्षा और क्षेत्रीय आर्थिक विकास के बीच समन्वय स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण अकादमिक पहल प्रस्तुत किया।
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