परिषद के सदस्य जल्द ही जौनपुर आकर करेंगे निरीक्षण
जांच—पड़ताल करते हुये स्थानीय लोगों से करेंगे पूछताछ
परिषद ने प्रशासनिक रिपोर्ट पर उठाये सवाल
हड़कम्प: अब जमीनी हकीकत की होगी पड़ताल
लखनऊ/नई दिल्ली। पत्रकार आशुतोष श्रीवास्तव की हत्या के मामले में भारतीय प्रेस परिषद ने जांच शुरू कर दी है। स्थानीय प्रशासन की रिपोर्ट से असंतुष्ट होने के बाद परिषद ने अब मामले की नवीनतम स्थिति और जांच की वास्तविक प्रगति का स्वयं आकलन करने का फैसला किया है। परिषद की जांच समिति ने सदस्य और सम्पादक अरुण त्रिपाठी को प्रकरण की व्यक्तिगत पड़ताल कर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने की जिम्मेदारी सौंपी है।
नई दिल्ली में बीते 5 अगस्त को हुई जांच समिति की बैठक में आशुतोष हत्याकांड पर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक में जौनपुर जिलाधिकारी की ओर से अपर जिलाधिकारी न्यायिक मोहम्मद अमान, पुलिस अधीक्षक की ओर से शाहगंज क्षेत्राधिकारी गिरीन्द्र सिंह तथा उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से मुख्य सहायक ज्ञान दास और अपर निदेशक राज्य सूचना केन्द्र सुनील कन्नौजिया मौजूद रहे।
बैठक में परिषद के सदस्य अरुण त्रिपाठी ने मामले की आगे पड़ताल और नवीनतम तथ्यों की जानकारी जुटाने की आवश्यकता जताई। इसके बाद समिति ने उन्हें प्रकरण की व्यक्तिगत जांच कर परिषद को स्थिति से अवगत कराने का दायित्व सौंपा। समिति ने यह भी स्पष्ट किया कि जरूरत पड़ने पर श्री त्रिपाठी जौनपुर का दौरा कर सकते हैं। इस दौरान राज्य सरकार को उन्हें आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।
भारतीय प्रेस परिषद का यह कदम इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि स्थानीय प्रशासन की रिपोर्ट से समिति पूरी तरह संतुष्ट नहीं है। अब जांच समिति का सदस्य खुद मामले की प्रगति, गवाहों के बयान, हत्या के कारणों और जांच में अब तक उठाए गए कदमों की पड़ताल करेगा। जौनपुर दौरे की स्थिति में स्थलीय निरीक्षण के साथ संबंधित लोगों और अधिकारियों से भी जानकारी जुटाई जा सकती है।
आशुतोष श्रीवास्तव की हत्या के मामले में प्रेस परिषद ने 17 मई 2024 को स्वतः संज्ञान लिया था। अब परिषद की ताजा पहल से पत्रकार हत्याकांड की जांच और पत्रकार सुरक्षा से जुड़े सवाल फिर केंद्र में आ गए हैं। मामले की सुनवाई फिलहाल स्थगित कर दी गई है। अगली तारीख की सूचना संबंधित पक्षों को बाद में दी जाएगी। परिषद के अध्यक्ष के निर्देश पर सचिव शुभा गुप्ता की ओर से जारी आदेश के बाद अब सबकी निगाहें अरुण त्रिपाठी की पड़ताल पर टिकी हैं। उनकी रिपोर्ट से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि हत्याकांड की जांच किस दिशा में आगे बढ़ी और न्याय की प्रक्रिया में अब तक क्या ठोस प्रगति हुई है।
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