रसूल-ए-ख़ुदा व इमाम हसन की शहादत पर निकला जुलूस
अंजुमनों ने नौहा—मातम करके पेश किया नजराने अकीदत
संजय शुक्ला
जौनपुर। मुसलमानों के आख़री नबी इस्लाम धर्म के प्रवर्तक रसूल-ए- ख़ुदा हजरत मोहम्मद मुस्तफा स.अ. और उनके बड़े नवासे दूसरे इमाम हजरत इमाम हसन अ.स. की शहादत की याद में शबे 27 सफर का जुलूस हुसैनिया नक़ी फाटक से उठा जो देर रात सम्पन्न हुआ। जुलूस में अन्जुमनों ने "हाय रसूले खुदा, हाय इमामे हसन" नौहा पढ़ा व मातम किया और रसूल व इमाम की शहादत पर श्रद्धांजलि अर्पित किया। इस दौरान भारी संख्या में महिला पुरूष व बच्चो ने भाग लिया।
नक़ी फाटक पर मजलिस हुई जहां सोजख़्वानी सै मो अब्बास काज़मी ने अपने साथियों के साथ किया। पेशख़्वानी फ़ैज़ व मोहम्मद ने किया। इस दौरान धर्म गुरु मौलाना महफूजुल हसन खां ने बताया कि मोहम्मद साहब ने ख़ुदा के पैग़ाम को पूरी दुनिया तक पहुंचाया। मजलूमों, गु़लामों, औरतों, बेसहारा व यतीमों को उनका हक़ दिलाया। मोहम्मद साहब ने इंसानों को मानवता का पाठ पढ़ाते हुये सच्चाई की राह पर चलने व अमन शान्ति का संदेश दिया। इस्लाम धर्म सबको समानता का अधिकार दिलाने का पैग़ाम देता है।
इसके बाद नक़ी फाटक के सामने मस्जिद पर तक़रीर करते हुये सै बाक़र मेहंदी ने रसूले खोदा व इमाम हसन पर हुये मसाएब को पढ़ा तो माहौल गमगीन हो गया। सब लोग रोने लगे। उसके बाद शबीहे ताबूत निकाला गया जिसमें शहर की अन्जुमने जुल्फेक़ारिया बड़ी मस्जिद, अजादारिया बारादुअरिया, कौसरिया रिज़वी खा व असग़रिया पुरानी बाजार ने नौहा मातम किया। मल्हनी पड़ाव होते हुये इमाम चौक वक्फ़ बीकानी बीबी डढ़ियाना टोला तक गई। जुलूस पुन: नक़ी फाटक में आकर सम्पन्न हुआ।
अन्त में सै. मो. मुस्तफा, शाहिद हुसैन एवं रजी हैदर जावेद ने आभार जताया। इस अवसर पर सै. हुसैन हैदर शोएब, सै. मो हसन नसीम, मौलाना सै. शाज़ान ज़ैदी, अनवारुल हसन, बच्छन, कायम, असद, मुफ्ती शारिब, कैफी आब्दी, हुसैन मुस्तफा वजीह, आबिद, जहीर हसन, इसरार हुसैन एडवोकेट, आमिर अब्बास सहित तमाम लोग उपस्थित रहे।
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