10 वर्षों से प्रभारी प्रधानाध्यापक, फिर भी बीईओ बनने की राह में अड़चन
डाॅ. प्रदीप दूबे
सुइथाकला, जौनपुर। बेसिक शिक्षा विभाग में वर्षों से प्रभारी प्रधानाध्यापक के रूप में विद्यालयों का संचालन कर रहे शिक्षक अब खुद को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं। उनका कहना है कि विद्यालय संचालन की पूरी जिम्मेदारी निभाने के बावजूद जब पदोन्नति अथवा उच्च पद पर अवसर देने की बात आती है तो उन्हें पीछे कर दिया जाता है। इसे लेकर सीनियर बेसिक शिक्षक संघ के व्हाट्सएप ग्रुप में शिक्षकों ने खुलकर अपनी नाराजगी जाहिर की है।
चर्चा के दौरान शिक्षक पीसी दुबे ने कहा कि विद्यालय में प्रत्येक कार्य के लिए प्रधानाध्यापक अथवा प्रभारी प्रधानाध्यापक की जिम्मेदारी तय की जाती है लेकिन अवसर की समानता की बात आने पर प्रभारी प्रधानाध्यापक को अलग कर दिया जाता है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब कई शिक्षक पिछले 8 से 10 वर्षों से लगातार प्रभारी प्रधानाध्यापक के दायित्व का निर्वहन कर रहे हैं तो उन्हें खंड शिक्षा अधिकारी बनने के अवसर से वंचित क्यों किया जाय?
शिक्षकों का कहना है कि प्रभारी प्रधानाध्यापक विद्यालय की प्रशासनिक व्यवस्था से लेकर शिक्षण कार्य और विभागीय दायित्वों का निर्वहन करते हैं। इसके बावजूद पूर्णकालिक प्रधानाध्यापकों को ही पदोन्नति में लाभ मिलने से वर्षों से जिम्मेदारी संभाल रहे प्रभारी शिक्षकों में निराशा है। शिक्षकों ने शासन से मांग किया कि लम्बे समय से प्रभारी प्रधानाध्यापक का दायित्व निभा रहे शिक्षकों के अनुभव और सेवा को ध्यान में रखते हुए उन्हें भी खंड शिक्षा अधिकारी बनने का समान अवसर दिया जाय।
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