शासन से आवंटित 25 लाख में 20 लाख खर्च, फिर भी कार्य अधूरा
जौनपुर। जनपद के श्री संस्कृत उच्चतर माध्यमिक विद्यालय नेवढ़िया का कायाकल्प केवल कागजी खानापूर्ति तक सीमित दिखायी दे रही है। इसको लेकर जहां क्षेत्र में तरह—तरह की चर्चाएं की जा रही हैं, वहीं विद्यालय से जुड़े लोगों द्वारा कार्यदायी संस्था को दोषी बताया जा रहा है।
बता दें कि प्रोजेक्ट अलंकार के तहत उक्त विद्यालय का कायाकल्प किया जा रहा है जिसके तहत 25 लाख का धन भी शासन से स्वीकृत है। इसमें 20 लाख के धन की निकासी दो किस्तों में हो गयी है लेकिन सब हवा—हवाई साबित हो रही है। कायाकल्प की बात करें तो निर्माण कार्य अधूरा है। पक्की चहारदीवारी बना है लेकिन अपूर्ण है। क्लास रूम का कार्य हुआ है लेकिन पठन—पाठन योग्य नहीं है। शौचालय अभी तक नहीं बना है जबकि फर्श कच्चा है। योजना का जो मानक है, वह पूरा होता नहीं दिख रहा है। वहीं संस्कृत विद्यालय का रंगाई-पुताई नहीं हुआ है।
इस बाबत पूछे जाने पर विद्यालय के प्रबन्धक विनोद तिवारी ने बताया कि लोक निर्माण विभाग कार्यदायी संस्था है जिसकी देख—रेख में योजना फलीभूत होना है। संस्था से जुड़े लोगों से कई महीने से कई बार कहा गया कि चहारदीवारी को पूर्ण कर दीजिये। शौचालय बनवा दीजिये। विद्यालय का रंगाई-पुताई करवा दीजिये। फर्श पक्का बनवा दीजिये लेकिन आजकल में बनवाने की बात करने वाले कार्यदायी संस्था के लोग महीनों बीत जाने के बाद भी योजना को लेकर लापरवाह बने हैं।
उन्होंने आगे बताया कि 25 लाख प्रोजेक्ट पर खर्च होना है जिसमें पहली किस्त 4 मार्च 2025 को 10 लाख आ गया जबकि दूसरी किस्त 20 मई 2026 को 10 लाख आया है। प्रोजेक्ट अलंकार के तहत विद्यालय का अब तक कायाकल्प हो जाना चाहिये था लेकिन अभी तक योजना का कार्य अधूरा है। इसके लिये कार्यदायी संस्था जिम्मेदार है।
वहीं इस परिप्रेक्ष्य में विद्यालय की प्रधानाचार्य रेखा सिंह ने बताया कि संस्कृत विद्यालय में प्रवेश शुरु हो गया है। पिछले सत्र के नामांकित बच्चे 145 हैं। इस सत्र का प्रवेश शुरू हो गया है। विद्यालय में सुबह 8 बजे से पढ़ाई शुरू होकर साढ़े 12 बजे तक होती है। प्रोजेक्ट अलंकार के बारे में कहा कि योजना अधूरा है जिससे पठन—पाठन में बच्चों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। कुल मिलाकर उपरोक्त कायाकल्प कोरा साबित हो रहा है जिस पर तमाम सवालिया निशान लग रहे हैं।
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