जौनपुर। बच्चों को बचपन से ही बाल संगत से जोड़ना आवश्यक है। बाल संगत में आने से बच्चों का सार्वभौमिक व आध्यात्मिक विकास होता है तथा वे प्यार, नम्रता व सहनशीलता जैसे दैवीय गुण ग्रहण करते हैं। यही गुण उनके अपने कैरियर और मिशन में आगे बढ़ने का मार्ग प्रशस्त करता है। बच्चे मन के सच्चे होते हैं, उनमें बैर, इर्ष्या, द्वेष आदि बुराइयां नहीं होतीं। आज के बच्चे आने वाले अच्छे समाज की नींव के पत्थर हैं जो आगे चलकर सुदृढ़ तथा ऊंच-नीच की भावना से उठकर स्वच्छ समाज का निर्माण करने में सक्षम होंगे। आप चाहे तो उन्हें प्यार, मिल वर्तन, भाईचारा आदि अच्छी भावनाएं सीखा करके एक अच्छा नागरिक और इंसान बना सकते हैं। संस्कारवान बच्चे ही देश व समाज का भविष्य उज्जवल बनाते हैं।
उक्त उद्गार नगर के मड़ियाहूं पड़ाव स्थित संत निरंकारी सत्संग भवन जौनपुर के प्रांगण में जोन स्तरीय निरंकारी बाल समागम पर उपस्थित विशाल सन्त समूह को सम्बोधित करते हुये लखनऊ से आये विद्वान संत जीएस तिवारी केन्द्रीय ज्ञान प्रचारक ने व्यक्त किया।
इस दौरान बच्चों और युवाओं ने गीत, भजन, कविताएं और लघु नाटक के साथ प्रेरक विचार व्यक्त करते हुये निरंकार प्रभु और सत्संग से जुड़े रहने की सीख दिया। वहीं अमरनाथ विश्वकर्मा जोनल इंचार्ज ने निरंकारी बाल समागम के सफल आयोजन पर बच्चों, अभिभावकों, सेवादल अधिकारियों, सदस्यों, खेल मंत्री युवा कल्याण विभाग एवं साध संगत का स्वागत करते हुये आभार भी व्यक्त किया।
इस अवसर पर तमाम ब्रांचों के मुखी महात्मा, संयोजक, क्षेत्रीय संचालक, संचालक, शिक्षक आदि उपस्थित रहे। इस बाल समागम में निरंकारी बाल प्रदर्शनी भी लगायी गयी जिसमें बहुत ही सुंदर ढंग से मिशन के संदेशों को उजागर किया गया।
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