जिम्मेदार अधिकारी शिकायती पत्र को पढ़ने की नहीं समझते हैं जरूरत: बजरंगी
अरविन्द यादव
केराकत, जौनपुर। स्थानीय क्षेत्र के थानागद्दी (ज़खिया) निवासी वरिष्ठ समाजसेवी बजरंग बहादुर उर्फ बजरंगी सिंह जिलाधिकारी सैमुअल पाल एन. को विगत 10 जून को दिये शिकायती पत्र में एसडीएम केराकत, बीएसए व क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड वाराणसी पर मामले में जांच आख्या उपलब्ध न कराए जाने को लेकर कानूनी कार्रवाई की मांग को उठाई है।
मामला तब प्रकाश में आया जब बजरंगी सिंह शिकायत की वर्तमान स्थित को जानने मंगलवार को तहसील पहुंचे। शिकायत की वर्तमान स्थित को जान पैरों तले से जमीन खिसक गई। उन्होंने कहा कि जिस शिकायत पर एसडीएम, बीएसए व क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड पर कार्यवाही की मांग की गई, उसे राजस्व निरीक्षक/लेखपाल को कैसे प्रेषित की गई? उन्होंने कहा कि शिकायती पत्र जिलाधिकारी कार्यालय से सीआरओ कार्यालय भेजा गया। इसी क्रम में एसडीएम केराकत कार्यालय पहुंचा।
एसडीएम कार्यालय में पत्रक पढ़ने के बजाय तहसीलदार को प्रेषित करते हुए राजस्व निरीक्षक/लेखपाल तक पहुंच गया। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि जिम्मेदार अधिकारीयों के इस उदासीन रवैए को देखकर ऐसा प्रतीत हो रहा है कि जिम्मेदार अधिकारी शिकायती पत्र को पढ़ने की जरूरत ही नहीं समझते हैं, उन्हें केवल शिकायती पत्र को डाक कार्य संचालन प्रक्रिया को अपनाते हुए अपने दायित्व से पल्ला झाड़ लेते हैं।
क्या है मामला
बता दें कि वरिष्ठ समाजसेवी बजरंग बहादुर ने विगत 24 अप्रैल को तत्कालीन जिलाधिकारी डॉ. दिनेश चंद्र से मिल शिकायती पत्र सौंपते हुये आरोप लगाया कि केराकत तहसील के गोमती नदी के उत्तरांचल व दक्षिणांचल क्षेत्र में तमाम प्राथमिक विद्यालय से लेकर उच्च शिक्षण संस्थान संचालित हो रहे हैं। विद्यालय के इर्द-गिर्द सटे हुए ईंट-भट्ठे संचालित हो रहे। ऐसे में चिमनियों से निकलने वाले धुओं से विद्यालय का वातारण दूषित हो रहा है जिससे विद्यालय में अध्ययन करने वाले छात्र/छात्राओं के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है जिसकी टेलीफोनिक शिकायत तत्कालीन बीएसए डॉ. गोरखनाथ पटेल से की गई थी जिस पर उन्होंने जांच का आश्वासन दिया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए डीएम डॉ. दिनेश चंद्र ने 27 अप्रैल को 3 सदस्यीय टीम गठित की, जिसमें एसडीएम केराकत को अध्यक्ष, बीएसए व क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड वाराणसी को सदस्य नामित कर जांच के लिए आदेशित किया। एक माह बीत जाने के बाद कार्रवाई न होने पर पुनः 10 जून को जिलाधिकारी सैमुअल पाल एन. से मिल टीम में गठित अधिकारियों पर आदेश का अनुपाल न करने पर कानूनी कार्रवाई की मांग किया।
धन्यवाद पत्र को शिकायती पत्र बताकर मांग ली गयी थी आख्या
बोड़सर गांव निवासी किसान नेता अजीत सिंह के लगभग 14 वर्षों के लंबे संघर्ष के बाद जब किसानों को मुआवजा मिलना शुरू हुआ तो संगठन द्वारा 29 मई को मुख्यमंत्री का आभार व धन्यवाद ज्ञापित करने के उद्देश्य से प्रमुख सचिव से मिल इस उद्देश्य से पत्रक सौंपा गया कि पत्रक को मुख्यमंत्री तक पहुंचाया जायेगा, मगर संबंधित पत्रक को बिना पढ़े धन्यवाद पत्र को शिकायती पत्र मानते हुए आईजीआरएस पोर्टल पर दर्ज कर दिया गया। मामला सामने आया तो जनपद में चर्चा का विषय बन गया। इस बाबत किसान नेता अजीत सिंह ने कहा था कि इस प्रकार की कार्रवाई से न केवल पत्र की मूल भावना प्रभावित हुई। अनावश्यक प्रशासनिक भ्रम भी उत्पन्न हो गया।
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