दो बाइकों की आमने-सामने भिड़ंत में बस चालक की गयी जान
दूसरे का बीएचयू में हुई मौत
अजय विश्वकर्मा
सिद्दीकपुर, जौनपुर। सरायख्वाजा थाना क्षेत्र के लपरी गांव स्थित पेट्रोल पम्प के सामने रविवार रात करीब 10 बजे दो मोटरसाइकिलों की आमने-सामने हुई जोरदार टक्कर में 34 वर्षीय युवक की इलाज के दौरान मौत हो गई जबकि दूसरे युवक की हालत गंभीर होने पर उसे ट्रॉमा सेंटर वाराणसी रेफर किया गया है। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजकर मामले की जांच शुरू कर दी है।
जानकारी के अनुसार लपरी गांव निवासी हक्कीमुद्दीन का पुत्र इमरान निजी बस चालक था। परिजनों ने बताया कि रविवार को वह रोज की तरह बस लेकर निकला था। देर शाम बस खड़ी करने के बाद वह मोटरसाइकिल से शाहगंज की ओर से अपने घर लौट रहा था। जैसे ही वह लपरी गांव स्थित पेट्रोल पम्प के सामने पहुंचा। सामने से आ रही दूसरी मोटरसाइकिल से उसकी जोरदार टक्कर हो गयी।
टक्कर इतनी भीषण थी कि दोनों बाइक सवार गंभीर रूप से घायल हो गये। आस—पास के लोगों ने तत्काल एम्बुलेंस की मदद से दोनों घायलों को जिला अस्पताल पहुंचाया। वहां चिकित्सकों ने इमरान को मृत घोषित कर दिया जबकि दूसरे घायल की गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे ट्रॉमा सेंटर वाराणसी रेफर कर दिया गया। सोमवार को दोपहर में घायल पंकज सिंह पुत्र धनंजय सिंह बोधाई निवासी हडहीं की मौत हो गई। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर वाराणसी में ही पोस्टमार्टम कराकर शव को परिवार को सौंप दिया। पंकज का शव शाम गांव में आते ही कोहराम मच गया।
इस बाबत पूछे जाने पर सरायख्वाजा थाना प्रभारी अमरेंद्र पाण्डेय ने बताया कि शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। दुर्घटना के कारणों की जांच की जा रही है।
4 मासूम बच्चों के सिर से उठा पिता का साया
इमरान अपने पीछे पत्नी अकबरी बानो और 4 छोटे बच्चों— दिलसान (13 वर्ष), अलफिया (9 वर्ष), साबरीन (7 वर्ष) और अहद (5 वर्ष) को छोड़ गया है। पति की असमय मौत से पत्नी का रो-रोकर बुरा हाल है। परिवार और ग्रामीण इस बात से स्तब्ध हैं कि इमरान अपने घर से महज 200 मीटर पहले ही हादसे का शिकार हो गया। परिजनों के अनुसार इमरान ही परिवार का एकमात्र कमाने वाला सदस्य था और बस चलाकर पूरे परिवार का भरण-पोषण करता था। उसकी मौत के बाद परिवार पर आर्थिक संकट भी गहरा गया है। गांव में शोक का माहौल है और हर किसी की जुबान पर यही सवाल है कि घर की चौखट तक पहुंचने से पहले ही किस्मत ने इतनी बड़ी चोट क्यों दे दी।
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