लोगों ने जतायी चिन्ता, कहा— कभी भी हो सकता है बड़ा हादसा
शाहगंज, जौनपुर। स्थानीय नगर के सबसे व्यस्ततम और संवेदनशील मार्गों में शुमार सेंट थॉमस चौराहा स्कूली बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता का केंद्र बना हुआ है। प्रतिदिन इस चौराहे से नगर के करीब आधा दर्जन प्रमुख विद्यालयों के हजारों छात्र-छात्राएं आवागमन करते हैं लेकिन उनकी सुरक्षा के लिए अब तक कोई ठोस और प्रभावी व्यवस्था नहीं की गई है। ऐसे में नौनिहाल अपनी जान जोखिम में डालकर सड़क पार करने को विवश हैं जिससे अभिभावकों और स्थानीय नागरिकों में गहरी चिंता व्याप्त है।
सुबह विद्यालय खुलने के समय और दोपहर छुट्टी के दौरान सेंट थॉमस चौराहा पूरी तरह वाहनों के दबाव में आ जाता है। इस दौरान तेज रफ्तार बाइक, कार, ऑटो और भारी वाहन लगातार गुजरते रहते हैं। सड़क पार करने के लिए बच्चों को काफी देर तक इंतजार करना पड़ता है और कई बार जोखिम उठाकर भागते हुए सड़क पार करनी पड़ती है। छोटे बच्चों के साथ अभिभावक भी भय और आशंका के बीच उन्हें सुरक्षित निकालने की कोशिश करते दिखाई देते हैं।
चिंता की बात यह है कि इतने संवेदनशील और भीड़भाड़ वाले इस चौराहे पर न यातायात पुलिस की नियमित तैनाती है और न ही वाहनों की गति नियंत्रित करने के लिए स्पीड ब्रेकर की समुचित व्यवस्था। इसके अलावा चेतावनी संकेतक, स्कूल जोन बोर्ड, बैरिकेडिंग जैसी बुनियादी सुविधाओं का भी अभाव है। सुरक्षा संसाधनों की यह कमी किसी बड़े हादसे को खुला निमंत्रण देती नजर आ रही है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि पूर्व में भी इस चौराहे पर कई छोटे-बड़े हादसे हो चुके हैं जिनमें लोगों को चोटें आईं और जान-माल का काफी नुकसान हुआ। बावजूद इसके संबंधित विभाग और प्रशासन ने अब तक इस समस्या को गंभीरता से नहीं लिया। लोगों का आरोप है कि कई बार शिकायत किए जाने के बाद भी हालात जस के तस बने हुए हैं।
क्षेत्रीय अभिभावकों का कहना है कि हर रोज बच्चों को स्कूल भेजते समय मन में अनहोनी की आशंका बनी रहती है। उनका कहना है कि यदि समय रहते आवश्यक सुरक्षा उपाय नहीं किए गए तो किसी दिन बड़ी दुर्घटना हो सकती है।
नगरवासियों और सामाजिक संगठनों ने प्रशासन से मांग किया कि सेंट थॉमस चौराहे को तत्काल संवेदनशील स्कूल जोन घोषित करते हुए यहां स्थायी रूप से यातायात पुलिस की तैनाती की जाए। साथ ही स्पीड ब्रेकर, चेतावनी संकेतक, स्कूल टाइम बैरिकेडिंग तथा वाहनों की गति सीमा निर्धारित कर सख्ती से पालन कराया जाए, ताकि मासूम बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके और अभिभावकों की चिंता दूर हो।
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