अवधेश मौर्य
जौनपुर। जब हृदय में करुणा, प्रेम और एकत्व की दिव्य चेतना जागृत होती है, तब मानव अपने सीमित स्वार्थों से ऊपर उठकर सम्पूर्ण सृष्टि के कल्याण का सशक्त माध्यम बन जाता है। परोपकार, करुणा और परमार्थ जैसे अलौकिक मूल्यों से प्रकाशमान यह पावन अवसर उस दिव्य अनुभूति का प्रतीक बना जहाँ “मानव को मानव हो प्यारा, एक-दूजे का बने सहारा” का संदेश केवल शब्दों तक सीमित न रहकर हृदयों में जीवंत हुआ।
‘मानव एकता दिवस’ बाबा गुरबचन सिंह जी की दिव्य स्मृति में सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज एवं निरंकारी राजपिता जी के सान्निध्य में दिल्ली के ग्राउंड नं. 8 में आयोजित हुआ। साथ ही समूचे देश की हजारों सत्संग केंद्रो पर श्रद्धा और समर्पण भाव से सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ। यह केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि प्रेम, सद्भाव और निष्काम सेवा का जीवंत स्वरूप बनकर उभरा।
सन्त निरंकारी मण्डल के सचिव जोगिन्दर सुखीजा ने बताया कि समूचे भारतवर्ष के लगभग 200 स्थानों पर रक्तदान शिविरों का सफल आयोजन किया गया जिससे लगभग 40,000 यूनिट रक्त संकलित किया गया जो निष्काम सेवा, परोपकार और मानवता के प्रति समर्पण की जीवंत अभिव्यक्ति बनकर उभरा। युग प्रवर्तक बाबा गुरबचन सिंह की स्मृति में यह दिवस वर्ष भर चलने वाली सेवा-सरिता का शुभारम्भ है जिसके अन्तर्गत देश भर में लगभग 705 स्थानों पर रक्तदान शिविर आयोजित किये गये जो करुणा और एकत्व की भावना को सुदृढ़ किये।
स्थानीय मीडिया सहायक उदय नारायण जायसवाल ने बताया कि मानव एकता दिवस पर मड़ियाहूं पड़ाव पर स्थित सन्त निरंकारी सत्संग भवन ब्रांच जौनपुर में रक्तदान शिविर का आयोजन हुआ। शिविर में जिला चिकित्सालय के अनुभवी चिकित्सक एवं उनकी टीम ने रक्तदाताओं की समुचित स्वास्थ्य जांच के उपरान्त सुरक्षित, सुव्यवस्थित एवं प्रभावी ढंग से रक्तदान की प्रक्रिया सम्पन्न कराई जिनसे 188 रक्त युनिट संकलित की गयी। जनपद के कई ब्रांचों से श्रद्धालु भक्तों ने पूर्ण उत्साह और समर्पण के साथ स्वेच्छा भाव से रक्तदान करके मानव कल्याण में अपना सहयोग दिया। सम्पूर्ण आयोजन के दौरान स्वच्छता, सतर्कता एवं सेवा-भाव का विशेष ध्यान रखा गया जिससे यह पहल केवल जीवनदायिनी सेवा तक सीमित न रहकर मानवता, करुणा और उत्तरदायित्व के उच्चतम आदर्श का प्रतीक बनकर उभरी। इस अवसर पर तमाम लोग उपस्थित रहे।
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