Jaunpur News: यूपी में पाइप गोदामों में सिलसिलेवार आग: 4 जिलों में करोड़ों का नुकसान, उठे बड़े सवाल

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Jaunpur News: यूपी में पाइप गोदामों में सिलसिलेवार आग: 4 जिलों में करोड़ों का नुकसान, उठे बड़े सवाल


22–24 अप्रैल के बीच वाराणसी, बागपत, जौनपुर और अम्बेडकरनगर में जल जीवन मिशन से जुड़े भण्डारों में लगी भीषण आग, जांच की मांग तेज


सुशील स्वामी

जौनपुर। उत्तर प्रदेश के कई जिलों में बीते 22 से 24 अप्रैल के बीच रहस्यमयी परिस्थितियों में प्लास्टिक पाइपों के भंडारों में आग लगने की घटनाओं ने प्रशासन और आम जनता को चौंका दिया है। जल जीवन मिशन से जुड़े इन गोदामों में लगी आग से लाखों ही नहीं, बल्कि अनुमानित तौर पर करोड़ों रुपये की संपत्ति जलकर राख हो गई है। घटनाओं की समानता को देखते हुए अब इन मामलों में बड़ी साजिश की आशंका जताई जा रही है।


चार जिलों में एक जैसी घटनाएं

सबसे बड़ी घटना वाराणसी के बड़ागांव थाना क्षेत्र के अनेई बाजार में सामने आई जहां तुलसीदास इंटर कॉलेज के पास पाइपों के बड़े भंडार में भीषण आग लग गई। आग इतनी विकराल थी कि करीब 5 किलोमीटर दूर तक धुएं का गुबार देखा गया। इसी तरह बागपत में जल निगम के नए प्लास्टिक पाइपों के स्टॉक में आग लगने से लाखों रुपये का नुकसान हुआ। जौनपुर के मियांचक बाजार स्थित गोदाम में भी आग ने भारी तबाही मचाई जहां बड़ी मात्रा में रखे पीवीसी पाइप जलकर नष्ट हो गये। वहीं अंबेडकरनगर के अकबरपुर क्षेत्र स्थित निमिया हुआ पोखरा के पास जल जीवन मिशन के गोदाम में भी इसी तरह की आग की घटना सामने आई।

खुले में रखे पाइप बने खतरा

जानकारी के अनुसार अधिकतर स्थानों पर ये पीवीसी पाइप खुले मैदानों या अस्थायी गोदामों में रखे गए थे जिससे आग तेजी से फैल गई और काबू पाना मुश्किल हो गया।



साजिश या लापरवाही? उठ रहे सवाल

लगातार अलग-अलग जिलों में एक जैसे हालात में आग लगने की घटनाओं ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय स्तर पर यह चर्चा तेज है कि यह केवल हादसा नहीं बल्कि किसी बड़ी साजिश का हिस्सा भी हो सकता है। हालांकि अभी तक किसी भी घटना के पीछे स्पष्ट कारण सामने नहीं आया है।



जांच की मांग तेज

इन घटनाओं के बाद अब उच्च स्तरीय जांच की मांग उठने लगी है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि यह महज लापरवाही है या इसके पीछे कोई सुनियोजित षड्यंत्र। यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाये गये तो भविष्य में इस तरह की घटनाएं और भी बड़े नुकसान का कारण बन सकती हैं। इन घटनाओं ने न सिर्फ सरकारी व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि जल जीवन मिशन जैसी महत्वपूर्ण योजना की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर चिंता पैदा कर दी है।

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