Jaunpur News: तीन बार की नाकामी बनी ताकत

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खुटहन के संतोष विश्वकर्मा बने असिस्टेंट कमिश्नर, पीसीएस में 115वीं रैंक से रचा इतिहास

बृजेश यादव

खुटहन, जौनपुर। सथानीय क्षेत्र के शेरपट्टी गांव से एक ऐसी प्रेरणादायक कहानी सामने आई है जिसने यह साबित कर दिया कि असफलता अंत नहीं, बल्कि सफलता की पहली सीढ़ी होती है। गांव के होनहार संतोष विश्वकर्मा ने यूपी पीसीएस परीक्षा में 115वीं रैंक हासिल कर असिस्टेंट कमिश्नर पद पर चयनित होकर पूरे क्षेत्र और प्रदेश का नाम रोशन कर दिया है।

संतोष की यह सफलता यूं ही नहीं मिली। उन्होंने पहले यूपीएससी की परीक्षा तीन बार दी लेकिन हर बार असफलता हाथ लगी। हालांकि उन्होंने हार नहीं मानी, बल्कि इन असफलताओं को चुनौती के रूप में स्वीकार किया। पिता की सलाह पर जब उन्होंने पहली बार यूपी पीसीएस की परीक्षा दी तो अपनी मेहनत और लगन के दम पर शानदार सफलता हासिल कर ली।

संतोष के पिता सूबेदार विश्वकर्मा गाजियाबाद में एक मिल में इलेक्ट्रीशियन के पद पर कार्यरत रहे हैं। साधारण परिवार से आने वाले संतोष की शुरुआती पढ़ाई-लिखाई गाजियाबाद में ही हुई। उन्होंने सनातन धर्म राजकीय इंटर कॉलेज से हाईस्कूल और इंटरमीडिएट पास किया। इसके बाद चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय से बीएससी और एमएससी (गणित) में उत्कृष्ट अंक प्राप्त किये। परिवार में भी शिक्षा का माहौल साफ झलकता है। संतोष 3 भाइयों में सबसे बड़े हैं। उनके एक भाई बिजली विभाग में एसडीओ के पद पर कार्यरत हैं जबकि दूसरा भाई नीट परीक्षा पास कर बीएएमएस की पढ़ाई कर रहा है। माता सुशीला देवी गृहिणी हैं जिन्होंने हमेशा बेटे का मनोबल बढ़ाया।

संतोष अपनी सफलता का श्रेय अपनी कड़ी मेहनत, माता-पिता के मार्गदर्शन और गुरुजनों के आशीर्वाद को देते हैं। उनकी इस उपलब्धि से पूरे शेरपट्टी गांव में जश्न का माहौल है और लोग गर्व से उनका नाम ले रहे हैं। संतोष विश्वकर्मा की यह सफलता उन लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा है जो असफलताओं से घबराकर अपने सपनों को छोड़ देते हैं। उन्होंने यह दिखा दिया कि अगर इरादे मजबूत हों तो कोई भी मंजिल दूर नहीं।



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