Jaunpur News: अफसरों की 'खामोशी' में घूट रहा कलेक्ट्रेट परिसर

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Jaunpur News:  अफसरों की 'खामोशी' में घूट रहा कलेक्ट्रेट परिसर




जौनपुर की कचहरी बनी जाम की प्रयोगशाला

सुशील स्वामी

जौनपुर। जिस परिसर से जिले की कानून-व्यवस्था, विकास और प्रशासनिक फैसले निकलते हैं, वही कलेक्ट्रेट–कचहरी–विकास भवन–रजिस्ट्री कार्यालय आज अव्यवस्था, अराजकता और ट्रैफिक जाम का स्थायी अड्डा बन चुका है। हालात यह हैं कि पूरा कैंपस दिनभर चार पहिया वाहनों से भरा रहता है लेकिन जिम्मेदारी संभालने वाले अफसरों को यह अव्यवस्था शायद दिखाई नहीं देती।

सुबह से शाम तक सैकड़ों फोर व्हीलर बिना रोक-टोक परिसर में घुस जाते हैं। न कोई तय पार्किंग, न प्रवेश-निकास का अनुशासन। नतीजा यह कि कचहरी के भीतर ही जाम लग जाता है और पैदल चलना तक दूभर हो जाता है। बुजुर्ग, महिलाएं, फरियादी और कर्मचारी घंटों जूझते रहते हैं जबकि ‘व्यवस्था के मालिक’ अपनी गाड़ियों से सीधे दफ्तरों तक पहुंच जाते हैं।

स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि कचहरी परिसर से जुड़ी सड़कों पर भी अक्सर लंबा जाम लग जाता है जिससे पूरा शहर प्रभावित होता है। कई बार आपात सेवाओं के वाहन तक जाम में फंस जाते हैं लेकिन इसके बावजूद व्यवस्था सुधारने की दिशा में कोई ठोस पहल होती नजर नहीं आती।

परिसर में स्थित पत्रकार भवन तक पहुंचना भी अब किसी परीक्षा से कम नहीं है। पत्रकारों का कहना है कि कई बार घंटों जाम में फंसना पड़ता है और जरूरत पड़ने पर भी वाहन बाहर नहीं निकल पाते। सवाल यह उठता है कि जब हर दिन अफसर इसी जाम से गुजरते हैं तो फिर यह समस्या उन्हें ‘क्यों नहीं दिखती’?

फरियादियों में आक्रोश है कि नियम-कानून सिर्फ आम आदमी के लिए बने हैं। रसूखदारों की गाड़ियां परिसर में बेधड़क दौड़ती हैं और आम नागरिक जाम में फंसा रह जाता है। लगता है कि अव्यवस्था को ही व्यवस्था मान लिया गया है।

अब जनता की मांग है कि कचहरी परिसर को तत्काल नो-व्हीकल जोन घोषित किया जाय, बाहरी पार्किंग की प्रभावी व्यवस्था हो और ट्रैफिक नियंत्रण के लिए सख्ती बरती जाए। वरना यह जाम किसी दिन बड़े हादसे की वजह बन सकता है जिसकी जिम्मेदारी तय करना मुश्किल हो जायेगा।



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