
सरस सिंह
जौनपुर। वर्ष 2000 में दर्ज मुकदमा अपराध संख्या 140/2000 में विशेष एमपी-एमएलए न्यायालय (अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वितीय) ने सभी आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया है। न्यायालय द्वारा 19 फरवरी को पारित आदेश में साक्ष्यों के अभाव में आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी करने का निर्णय सुनाया गया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार आरोपिपी सुरेंद्र प्रताप सिंह, सुबेदार सिंह, संजय पाठक, भूपेंद्र सिंह, देवेंद्र प्रताप सिंह तथा गुलाब चंद्र पांडेय के विरुद्ध भारतीय दंड संहिता की धारा 147, 148, 332, 353, 323, 504, 506, 427 तथा 7 क्रिमिनल लॉ अमेंडमेंट एक्ट के तहत आरोप लगाए गए थे। यह मामला वर्ष 2000 में दर्ज हुआ था और लंबे समय से न्यायालय में विचाराधीन था।
न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि प्रस्तुत साक्ष्यों एवं गवाहों के आधार पर आरोप सिद्ध नहीं हो सके। इसके चलते सभी आरोपियों को दोषमुक्त किया जाता है। आदेश में यह भी उल्लेख किया गया कि आरोपी पूर्व से जमानत पर थे जिसे निरस्त करते हुए उन्हें धारा 437-ए के अंतर्गत नियमानुसार बंधपत्र देने के निर्देश दिये गये हैं। न्यायालय ने आदेश की प्रति अभिलेख में सुरक्षित रखने के निर्देश भी दिये।
अभियुक्तों की ओर से मुकदमे की पैरवी वरिष्ठ अधिवक्ता दुष्यन्त सिंह ने की। उनके साथ सहयोगी अधिवक्ता शेषनाथ सिंह एवं अभिनव सिंह ने प्रभावी ढंग से पक्ष रखा। बचाव पक्ष के तर्कों और प्रस्तुत साक्ष्यों को न्यायालय ने स्वीकार करते हुए यह फैसला सुनाया। फैसले के बाद संबंधित पक्ष के समर्थकों में खुशी का माहौल देखा गया। उन्होंने इसे न्याय की जीत बताते हुए कहा कि अंततः सत्य की विजय हुई है।
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