केराकत में गम्भीर मामला सामने आते ही अधिकारियों में खलबली
मतदाता सूची को लेकर क्षेत्र में चर्चाओं का बाजार हुआ गर्म
विनोद कुमार
केराकत, जौनपुर। स्थानीय क्षेत्र के मुर्की गांव में मतदाता सूची को लेकर एक सनसनीखेज मामला प्रकाश में आया है। मामला तब प्रकाश में आया जब मुर्की का निवासी सुमैया बानो पत्नी मोहम्मद अफसर ने मंगलवार को निर्वाचन रजिस्ट्रीकरण अफसर को पत्रक सौंप गंभीर आरोप लगाते हुए शिकायत किया कि सोमवार को ज्ञात हुआ कि मेरे वोटर आईडी नंबर का दुरुपयोग करते हुए किसी अज्ञात युवक द्वारा मेरे ग्राम पंचायत वोटर आईडी के भाग संख्या 138 व 139 पर कुल 146 मतदाताओं को स्थायी रूप स्थानांतरित दिखा कर प्रारूप 7 के माध्यम से नाम कटवाने के लिए फॉर्म भरकर तहसील में जमा कराया गया है जबकि निर्वाचन नामावली के भाग संख्या 139 व क्रम संख्या 103 पर मेरा नाम अंकित है। इस तरह का कृत्य मुझे बदनाम करने की साजिश है जिसका मैं किसी प्रकार से जिम्मेदार नहीं हूं। न मुझे इस विषय में कोई जानकारी है और न ही मैंने अपनी ईपिक संख्या के प्रयोग की अनुमति किसी को दी है। उन्होंने उच्चाधिकारी से उक्त प्रकरण को संज्ञान में लेते हुए मुकदमा पंजीकृत कर कठोर कार्रवाई करने की मांग किया। वहीं मामला प्रकाश में आने के बाद एक ओर जहां तहसील प्रशासन में हड़कंप मचा हुआ है तो वहीं क्षेत्र में मतदाता सूची को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है।
फार्म-7 पर दिखा बड़ा खेल
मतदाता सूची के सनसनीखेज खुलासा सामने आने पर जब 'तेजस टूडे' की टीम इस हकीकत की पड़ताल करने मुर्की गांव पहुंची तो पता चला कि लोग अपने फॉर्म के साथ प्राथमिक विद्यालय पर मौजूद होकर नाम कटने का विरोध कर रहे हैं। विद्यालय पहुंच फॉर्म-7 को देखा गया तो एक बड़ा 'खेल' सामने आया, फार्म पर ईपिक संख्या, मोबाइल नंबर व आवेदक का नाम अलग-अलग लोगों का पाया गया। लोगों ने बताया कि बीएलओ द्वारा सोमवार को नाम कटने की जानकारी मिली जबकि बाकायदा आवेदन फार्म के लिए अभिस्वीकृति फार्म की रसीद पर नियति तारीख एक फरवरी अंकित की गई है।
सीबीआई करे जांच, सहयोग के तैयार: पांचू
फार्म पर अंकित आवेदक पांचू राम ने बताया कि फार्म पर नाम कैसे अंकित हुआ है। इसकी कोई जानकारी नहीं है, फॉर्म पर नाम आने से मेरी छवि खराब हो गई है। गांव में हमारा नाम कोई भी जानता नहीं था और अब नाम सामने आने पर लोग गिरी हुई नजर से देख रहे है। साथ ही सभी अभिलेखों में मेरा नाम पांचू राम है, न कि पांचू है। उन्होंने कहा कि सहयोग के लिए तैयार हूं। पूरे प्रकरण की जांच सीबीआई से होनी चाहिये।
प्रकरण की निष्पक्ष की जाये जांच: सविस्ता
मुर्की प्राथमिक विद्यालय की प्रधानाध्यापिका सविस्ता ने बताया कि लेखपाल द्वारा सोमवार को प्राथमिक विद्यालय पर बीएलओ को 146 लोगों के नाम कटने की सूची दी। सूची देखी गई तो पता चला कि हमारे पिता आफताब का नाम कटा हुआ मिला। फॉर्म पर अंकित मोबाइल नंबर पर फोन किया गया तो कोई संजय पाण्डेय नाम के व्यक्ति ने फोन को उठाया और बताया कि मैं नहीं जानता हूं कि मेरा नंबर कौन दिया है? मेरे नंबर का गलत इस्तेमाल किया गया, उन्होंने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच की अपील किया।
आपत्ति पर होता है सत्यापन: संजय पाण्डेय
फार्म पर अंकित मोबाइल नंबर पर फोन किया गया तो संजय पाण्डेय से बात हुई तो उन्होंने बताया कि मैं केराकत विधानसभा का बीएलए-1 हूं और कार्यकर्ताओं को जहां से भी सूचना मिली हो और जिन नामों पर आपत्ति करना था उसमें नियम था कि बीएलए-1 के नाम, नंबर से भी आपत्ति की जा सकती है। फॉर्म-7 में आपत्ति का मतलब ये होता है कि सत्यापन करे, जांच करे। किन नामों पर शक है। संदेह है उन नामों की सूची जांच करने के लिए दी जाती है। साथ ही गांवों में कार्यरत बीएलओ से सत्यापन के लिए कहा जाता है। सत्यापन में सही पाया जाता है तो इनका नाम नहीं कटना चाहिए।
फार्म-7 का कब किया जाता है उपयोग?
किसी मतदाता की मृत्यु हो गई हो या कोई व्यक्ति स्थायी रूप से उस निर्वाचन क्षेत्र को छोड़कर कहीं और चला गया हो या एक ही व्यक्ति का नाम मतदाता सूची में एक से अधिक बार दर्ज है या फिर कोई व्यक्ति भारत का नागरिक नहीं है या मतदान के लिए कानूनी रूप से योग्य नहीं है। साथ ही अगर आप स्वयं मतदाता सूची से अपना नाम हटवाना चाहते हैं तो फॉर्म 7 का इस्तेमाल किया जाता है।
.jpg)











